
रोटी
रोटी
जब लूटी जाती है
जनता के हिस्से की रोटी
आदमी के हिस्से का प्रेम
मैं समझता हूं
सारी चीजें लूट ली गई है
सुंदर दुनिया के सपने
जमीन से आसमान
समुंद्र की लहरे
सूर्य का ताप
जीने के हक
हंसी, चुंबन, करुणा, सौन्दर्य
डाल दिया गया है
मरुभूमि में
बंजर बनने के लिए
क्षितिज से
हवा में
तैरते हुए लोकतंत्र के नारे
बेदखल कर दिए गए हैं
बजारों के धमाकों से
तब हम सभी समझते हैं
लुटेरों के हिस्से में आती है
रक्तरंजित दुनिया
ऐसे निर्णायक दौर में
जनता के हिस्से में आती है
सिर्फ और केवल सिर्फ
संघर्ष ,प्रतिरोध ,जनआंदोलन
और क्रांति….
