आरा/भोजपुर 02 जनवरी। स्थानीय लावारिस सेवा केंद्र के प्रांगण में डॉ के डी सिंह की व्यंग्य रचना “भोजपुरी पुड़िया” पर परिचर्चा का आयोजन प्रो बलराज ठाकुर की अध्यक्षता में की गई। कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत डॉ किरण कुमारी व संचालन भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पत्रकार नरेंद्र सिंह ने की।
परिचर्चा पर बोलते हुए चर्चित आलोचक जितेंद्र कुमार ने कहा की के डी बाबू तातल विषयन पर खर खराह चउल आ ओरहन के निवेश बा “भोजपुरी पुड़िया” में। पुड़िया के माध्यम से इन्होंने सामाजिक ,राजनीतिक एवं आर्थिक विसंगतियों पर करारा प्रहार सरल भोजपुरी भाषा में किया है।मोटे मोटे साहित्य की अपेक्षा इन्होंने छोटे छोटे साहित्य की रचना कर समाज के बीच रखा है।संचालन करते हुए पत्रकार नरेंद्र सिंह ने भोजपुरी पुड़िया के उद्भव पर प्रकाश डाला।इस दौरान डॉ के डी सिंह ने अपनी रचनाओं में से तीन रचना का पाठ किया।
अध्यक्षीय संबोधन में बलराज ठाकुर ने के डी बाबू की रचना को प्रतितिधक रचना बताते हुए कहा की इनकी पुड़िया सामाजिक स्तर पर कई संदेश देती है।इनकी रचना कुरुतियों की प्रतिशोध के रूप में है जो राजनीतिक ,सामाजिक और आर्थिक विषयों पर चोट कर रही है।
परिचर्चा को कवि जनार्दन मिश्र, डी एन सिंह, भरत जी,पोस्टल पेंशनर के मिथिलेश कुमार सिंह,शंभू नाथ,सुरेंद्र प्रसाद,शिव दास सिंह,जय प्रकाश चौधरी,कोइलवर जमालपुर के डॉ वीरेंद्र शर्मा आदि ने संबोधित किया।
अंत में कवि केशव ठाकुर ने भिखारी ठाकुर के व्यंग्यात्मक गीत की प्रस्तुति कर परिचर्चा में भागीदारी निभाई। कार्यक्रम भाषा साहित्य , जसम,भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान व पेंशनर समाज के समर्थन पर आयोजित था।
