
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)11 अप्रैल। गुरुवार को जैन धर्म के चौबिसवें तीर्थंकर भगवान महावीर के प्राकट्योत्सव पर आचार्य निलयम ,अहिसा समवाय केन्द्र में विश्व अध्यात्म मंडल के अध्यक्ष आचार्य धर्मेन्द्र ने कहा कि भगवान महावीर के दर्शन में विश्व मे उत्पन्न विभिन्न समस्याओं का समाधान निहित है ।आचार्य जी ने उदाहरण देते हुए कहा हिंसा का समाधान अहिंसा में,विग्रह का समाधान अपरिग्रह में,संग्रह का समाधान विसर्जन मे है। महावीर दर्शन यानी अनेकांत दर्शन।अनेकांत दर्शन यही सत्य है,यह सत्य नहीं है..इससे आगे का दर्शन है –यह भी सत्य हो सकता है अर्थात ही,नहीं से आगे कि दर्शन है भी।।आचार्य जी ने यह बताया की जैन दर्शन पुरूषार्थ प्रधान दर्शन है जिसमे अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह,अस्तेय और ब्रह्मचर्य पर बल दिया गया है।भगवान महावीर का ..जियो और जीने दो.. दर्शन मे जगत के जीव मात्र का कल्याण निहित है।
