आरा/भोजपुर 21 दिसंबर।राधा कृष्ण परिवार के तत्वाधान में चल रहे भागवत कथा के छठे दिवस पर आयोजित कथा में व्यासपीठ से आचार्य अजय कृष्ण शास्त्री जी ने आज बड़े ही सुंदर तरीके से कृष्ण सुदामा की मित्रता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण और सुदामा बचपन के मित्र और गुरुकुल में सहपाठी थे और उन्होंने गुरु सांदीपनि के मार्गदर्शन में अध्ययन किया था।उनकी शिक्षा पूरी होने पर वह अलग हो गए लेकिन कृष्ण और सुदामा अलग नहीं हुए एवं अपनी दिव्य मित्रता को नही भुल पाए आज के जमाने मे भी कृष्ण और सुदामा की दोस्ती एक मिशाल है जब भगवान कृष्ण बालपन में ऋषि संदीपन के यहाँ शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तो उनकी मित्रता सुदामा से हुई जहां एक तरफ कृष्ण जी का जन्म एक राजपरिवार में हुआ था वही सुदामा ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए परंतु आज भी दोनों की दोस्ती का गुणगान पूरी दुनिया करती है शिक्षा दीक्षा समाप्त होने के बाद भगवान श्री कृष्ण राजा बन गए वहीं दूसरी तरफ सुदामा के बुरे दिन शुरू हो गए अपनी स्थिति खराब होने के बाद सुदामा की पत्नी ने उन्हें राजा कृष्ण से मिलने जाने ले लिए कहा और पत्नी का जिद मानकर सुदामा अपने बाल सखा कृष्ण से मिलने उनकी नगरी द्वारका गए।
जब राजा कृष्ण अपने मित्र सुदामा के आने का संदेश पाकर वह खुद नंगे पैर उन्हें लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं और मित्र सुदामा की दयनीय हालत देखकर भगवान कृष्ण के आंसू थमने का नाम नही ले रहा था वही भगवान ने सुदामा का पैर आपने आंसुओं से धूल दिया। यह घटना भगवान श्री कृष्ण का अपने मित्र सुदामा के प्रति अनन्य प्रेम को दर्शाता है इसलिए कृष्णा सुदामा की दोस्ती की मिसाल आज भी दी जाती है। आज कथा वाचन के बाद भव्य रूप से भगवान की आरती की गई तत्पश्चात लोगो के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। शुक्रवार को भव्य भंडारे का आयोजन किया गया है जिसमे हजारों लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया जायेगा ।इस आशय की जानकारी आयोजन समिति के वरीय सदस्य पूर्व वार्ड पार्षद डॉ जितेंद्र शुक्ला ने दी।

