पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 20 नवम्बर। सूर्योपासना और लोक आस्था के महापर्व छठ में पौराणिकता समाहित है। छठ के गीतों में इसकी झलक मिलती है। सात्विक तरीके से और तन एवं मन की शुद्धता से छठव्रती छठ पर्व को मनाते हैं। पूरी आस्था और शुद्धता के साथ इस पर्व को मनाया जाता है। अगर यूं कहें कि आस्था का सागर है छठ पूजा तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
बिना किसी मंत्र के छठव्रती नदी, तालाब, सरोवर के जल में खड़ा होकर सूप में ठेकुआ तरह-तरह का फल एवं जलते दीपक को लेकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को डूबते सूर्य और कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पण करते हैं। नदी किनारे उमङती भीड़ और बदलते परिवेश में अब तो लोग तरह-तरह के सुंदर टप और स्विमिंग पूल में पानी मे खड़े होकर अर्घ्य देते हैं। यह एक ऐसी पूजा है जिसमें किसी पंडित या पुजारी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसमे मंत्रोच्चार की कोई आवश्यकता नहीं है। मंत्रोच्चार के बिना होती है यह पूजा। छठ पूजा के गीत ही इसके मंत्र हैं। छठ पूजा के दौरान गाये जाने वाले पौराणिक गीत इस पूजा की महत्ता को दर्शाते हैं।
लोगों में ऐसी धारणा है कि डूबते या गिरते चीज को लोग महत्व नहीं देते हैं।
जबकि छठ व्रत में डूबते भास्कर को के साथ-साथ उगते भास्कर को अर्घ्य दिया जाता है। छठ व्रत हमें कमजोर और मजबूत दोनों के प्रति सम्मान प्रकट करने की सीख देता है।
लोगों में भगवान भास्कर और छठ के प्रति इतनी श्रद्धा और भक्ति होती है कि लोग अपनी इच्छा पूर्ति के लिए भगवान भास्कर से आरजू विनती करते हैं।
“केरवा जे फरेला घवध में, ओपे सुगा मेङराये, मरबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए, सुगनी जे रोवेली वियोग से, आदित होईं न सहाय।”
पेड़ में फले केला के घौध पर सुगा यानी तोता मंडराता है और केला के फल को जूठा कर देता है जिसे धनुष से मार दिया जाता है। इस पर सुगनी यानी मादा तोता वियोग में रोते हुए सूर्य देवता से उसे जीवित करने की प्रार्थना करती है। यह सूर्य भगवान की महत्ता को दर्शाता है।
घोड़वा चढ़न लगी बेटा जे मांगीला, मांगअतानी लक्ष्मी पतोह, रूनकी झुनकी बेटी मांगीला, पढल पंडितवा दमाद, हे छठी मैया ललसा पुराई द हमार।
छठ के दौरान छठव्रती गीत के माध्यम से छठ मइया से अच्छा तथा संस्कारी पुत्र, अच्छी एवं लक्ष्मी रूप बहू, चंचल एवं संस्कारी पुत्री और विद्वान दामाद की कामना करती है।
छठव्रती अपनी लालसा पूरा करने की मांग छठ मैया से करती हैं।
छठ पूजा के गीत से पता चलता है कि आदिकाल से ही लोग पुत्र, पुत्री, पुत्रवधू और दामाद की कामना किया करते हैं। यह गीत लड़कियों को हेय दृष्टि से देखने वाली बात को खारिज करता है। आदिकाल से ही लोग लड़की और लड़की के लिए अच्छे एवं विद्वान दामाद की कामना करते चले आ रहे हैं।

