दीपावली के अवसर पर आम जनमानस मिट्टी के दीयें का करें प्रयोग।
बागपत/उत्तर प्रदेश 6 नवंबर।कच्चे माल के रूप में माटी का उपयोग कर मूर्तिया, खिलौने, बर्तन इत्यादि वस्तुएं बनाने का प्रचलन भारत में सदियों से रहा है। उत्तर प्रदेश में अब भी माटीकला के शिल्पी अपने परम्परागत उद्यम में लगे हुए है एवं विकल्प के रूप में प्लास्टिक उत्पादनों का निरन्तर प्रसार पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला है। इस प्राचीन कला को संरक्षित करने, माटी से निर्मित वस्तुओं को बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप आम जन तक पहुंचाया जा रहा है।
दीपावली पर्व के दृष्टिगत माटीकला का एक स्टाल कलैक्ट्रेट परिसर, बागपत में माटीकला शिल्पी संजय,निवासी-खेकडा, बागपत द्वारा माटीकला उत्पादों की बिक्री हेतु लगाया गया है। जिसका जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह द्वारा जायजा लिया गया और मिट्टी के दीपक का उपयोग करने के लिए मिट्टी के दीयें को प्रोत्साहित किया गया उन्होंने कहा मिट्टी के दीयें, बर्तनों का अधीक अधिक उपयोग करना चाहिए उन्होंने माटीकला से सम्बन्धित माटी कला उत्पादों की सराहना की एवं दीपावली के अवसर पर आम जनमानस को मिट्टी के दीयें प्रयोग हेतु प्रेरित किया जा रहा है। मिट्टी के उत्पाद, पर्यावरण को हानि पहुंचाने वाले प्लास्टिक उत्पादों की रोक का एक विकल्प भी है।


दीपावली के अवसर पर आम जनमानस मिट्टी के दीयें का करें प्रयोग।