मुख्य अतिथि के रूप में राजा आर्यव्रत सिंह रहे मौजूद।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 21 नवंबर। खैरागढ़ महोत्सव के दूसरे दिन कल पं. हरीश तिवारी (दिल्ली) के शास्त्रीय गायन, पद्मभूषण पं. बुधादित्य मुखर्जी (कोलकाता) के सितार वादन, व्योमेश शुक्ला एवं समूह (दिल्ली) के राम की शक्ति पूजा तथा डॉ. पीसीलाल यादव एवं समूह गंडई (छग) के लोकसंगीत : दूधमोंगरा की प्रस्तुति ने समां बांधे रखा। दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में राजा आर्यव्रत सिंह राजपरिवार खैरागढ़ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी मनीष पारख (दुर्ग), अमित बरडिया (राजनांदगांव) व हरीश चंद जैन (राजनांदगांव) उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजा आर्यव्रत सिंह ने अपने पूर्वज राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह व रानी पद्मावती को याद करते हुए कहा कि बिना किसी स्वार्थ के उन्होंने अपना यह ऐतिहासिक महल दान कर दिया। उन्होंने यहां अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों को लगन एवं मेहनत से संगीत-कला की शिक्षा लेने हेतु प्रेरित किया। अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि बीते कुछ वर्षों में इस विश्वविद्यालय का स्तर गिर गया था, परंतु कुलपति प्रो. लवली शर्मा के आने से यह स्तर वापस लौट रहा है।
कुलपति डॉ. शर्मा ने अपना महल दान करने वाले राजा-रानी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की और बताया कि किस तरह और किन प्रयत्नों से यह विश्वविद्यालय आज एशिया महाद्वीप में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में अपनी अलग छाप छोड़ता है। उन्होंने इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय पटल पर लाने हेतु किए जा रहे प्रयासों से सभी को अवगत कराया।
विश्वविद्यालय में नवाचार हेतु कुलपति डॉ. लवली शर्मा का हुआ सम्मान
कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के द्वारा कुलपति का पदभार ग्रहण करने के बाद विश्वविद्यालय में निरंतर नवाचार किया जा रहा है। इन्हीं नवाचारों के लिए आत्मनिर्भर खैरागढ़ अभियान के सदस्यों द्वारा शॉल, श्रीफल व मोमेंटो भेंट कर उनका सम्मान किया गया। अभियान के सदस्य अनुराग शांति तुरे ने कुलपति द्वारा किए गए नवाचारों से अवगत कराया जिसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति शुरू हुई।
सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने देर रात तक रही दर्शकों की भीड़
महोत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने देर रात तक दर्शकों की भीड़ लगी रही। सर्वप्रथम विश्वविद्यालय के संगीत संकाय के तंत्रीवाद्य विभाग के विद्यार्थियों द्वारा सितार, सरोद एवं वायलिन की सामूहिक प्रस्तुति दी गई। इसके बाद अवनद्ध वाद्य विभाग के विद्यार्थियों द्वारा तबला वादन की प्रस्तुति दी गई। फिर संगीत संकाय की एमपीए प्रथम वर्ष की छात्रा प्रिया कुमारी ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी।
इसके बाद पं. हरीश तिवारी (दिल्ली) ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। फिर प्रसिद्ध सितार वादक पद्मभूषण पं. बुधादित्य मुखर्जी (कोलकाता) द्वारा सितार वादन की प्रस्तुति दी गई। रागश्री से शुरू हुई सितार वादन की प्रस्तुति ने अंत तक तालियां बटोरीं। इसके बाद व्योमेश शुक्ला एवं समूह दिल्ली द्वारा राम की शक्ति पूजा की प्रस्तुति दी गई। अंत में लगभग 50 वर्षों से संचालित प्रदेश की संस्कृति एवं धरोहर को संरक्षित करने वाली संस्था दूधमोंगरा की शानदार प्रस्तुति हुई। डॉ. पीसीलाल यादव द्वारा संचालित दूधमोंगरा के कलाकारों द्वारा लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं।

