पटना/बिहार 1 अक्टूबर।ऑल इंडिया अभिभावक संघ अध्यक्ष राकेश रॉय की अध्यक्षता में आज अध्यात्मिक सत्संग समिति लव कुश टावर एग्जिबिशन रोड में एक परिचर्चा का आयोजन हुआ जिसका विषय था बिहार में गिरती शिक्षा व्यवस्था: समस्या और समाधान। इस कार्यक्रम का उद्घाटन पदमश्री सुधा वर्गीज, समाजसेवी कमल नोपानी, आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश कुमार रॉय ने अन्य बुधिजीवियो के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस परिचर्चा में कई समाजिक बुद्धिजीवी लोगों ने हिस्सा लिया और अपनी विचार रखा। राकेश रॉय ने जहां अपने द्वारा मांगे गए अनेकों आरटीआई का जिक्र करते हुए सरकार से सवाल किया जैसे अभी तक बिहार में 5418 स्कूलों का अपना भवन नहीं हैं। 54 प्रतिशत स्कूलों की चहारदीवारी नहीं हैं अभी तक 9006 स्कूलों में ही स्मार्ट क्लास के लिए समान पहुंचा हैं मतलब व्यवस्था की घोर कमी है। जब मेरे द्वारा सीबीएसई से ये सुचना मांगी गई की प्राईवेट स्कूल जो सीबीएसई एफिलिएटेड हैं और अभिभावको को किताब पोशाक कैंपस से ये इनके द्वारा बताए दुकान से खरीदने बोलते हैं तो कुछ करवाई का प्रावधान है तो आरटीआई में मेरे पास जवाब आया कि एफिलेशन बाई लॉज में इस कार्य के लिए स्कूल की एफिलिएशन रद्द तक प्रावधान है पर आप देखे आज तक कितने स्कूलों पर करवाई हुई है चुकी सीबीएसई अधिकारी और राज्य के शिक्षा अधिकारी का इस लूट में बराबर का हिस्सा होता है जिससे प्राईवेट स्कूल भी सिर्फ व्यवसाई का केन्द्र बनता जा रहा है।
मेरे एक और आरटीआई में मांगा गया की बताया जाय बिहार के कितने डीएम और डीईओ के लड़का लड़की सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं सिर्फ संख्या बताया जाए। पुरा सिस्टम मौन हो गया और जवाब आया हमें की ये पर्सनल चीज़े हैं। यही लोग हमारे गरीब बच्चों के लिए तरह तरह के नियम बनाते हैं पर बात जब इनकी करो जिनके बेटा बेटी प्राईवेट में पढ़ते हैं तो सब मौन हो जाते हैं। अगर इनके बच्चें सरकारी स्कूलों की ओर रूख करे तो बहुत से स्कूलों में स्वतः बदलाव आने लगेगी और वहां शिक्षा की गुणवता थोड़ी अच्छी होने लगेगी। अखिलेश कुमार और सुजित कुमार ने कहा कि अगर स्कूलों में व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाए और शिक्षकों को समान काम का समान वेतन लागू कर दिया जाए तो बहुत हद तक शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण आने के आसार बंध जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि ये परिचर्चा बिहार के हर जिले में होनी चाहिए और वे इसके लिए भरपुर सहयोग करेगें क्यूंकि ये मुद्दा हर एक बच्चे और अभिभावक से जुड़ा है। इसमें हर वर्ग हर समुदाय और हर राजनीतिक लोगों को अपने ओर से इस पहल का समर्थन करना चाहिए।
पद्मश्री सुधा वर्गीज ने लड़कियों के पढ़ाई के लिए एक ठोस और पुख्ता कार्य योजना बनानें पर बल दिया वहीं सुजित कुमार ने कहा कि हम अपने तरफ से छोटी छोटी प्रयास करते हि रहते हैं पर हम चाहते हैं की व्यवस्था बदले और हर गरीब अमीर को समान गुणवतापूर्ण शिक्षा मिले चुकी ये बच्चें ही हमारे देश के भविष्य हैं। प्रोफेसर डा. कन्हैया सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय पर भी सरकार गंभीरता से विचार करें और वहां पर पढ़ाई और प्रयोगशाला में उपयोग होने वाले हर चीज की उपलब्धता कराए। साथ ही दुसरे व्यवस्था की कमियों को दूर करे। अनिल रॉय ने कहा कि सरकार आरटीई पर बिल्कुल ध्यान नहीं देती जिसका प्राईवेट स्कूल खूब लाभ उठाते हैं और गरीब बच्चों का एडमिशन लेने से साफ मना कर देते हैं चुकी बीईओ और डीईओ की कार्य शैली किसी से छुपी नहीं हैं। सुनील सिन्हा ने कहा कि सरकार को चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा वैसे स्कूलों की संख्या होनी चाहिए जहां 1 से 12 तक का पढ़ाई एक ही स्कूल कैंपस में हो। समाजसेवी कमल नोपानीने कहा कि आप सबों द्वारा शुरू किए गए इस नेक कार्य में मेरी पुरी भागीदारी रहेगी हर तरीके से क्योंकि मैं भी चाहता हूं की सिर्फ़ बिहार ही नहीं बल्की पूरे देश के बच्चों को समान गुणवतापूर्ण शिक्षा मिले। इसके अलावा भी कई लोगों ने अपनी बात रखी और अंत में सहमती बनी की इस तरह की परिचार्च हर माह हो और इस परिचर्चा का निचोड़ सरकार तक पहुंचाते रहना होगा एक उम्मीद की किरण और अपने समाजिक दायित्व के साथ के इस देश के सभी बच्चों को मुफ़्त समान गुणवतापूर्ण शिक्षा मिलना चाहिए। रॉय ने अंतः कहा कि आज पुनः चर्चा के साथ साथ एक आंदोलन खड़ा करने का समय आ गया और बिहार तो महापुरषों का जन्मभूमि और कर्मभूमि रहा है हमसब को मिलकर इस आवाज को अंज़ाम तक पहुंचाना होगा इसमें बुद्धजीवी लोगों का अहम योगदान होगा जिन्हें चर्चा करने के साथ साथ सड़क पर भी उतरना होगा। ।परिचर्चा में शामिल अन्य लोग, सरदार हीरा सिंह बग्गा, दिलीप कुमार , पवन कुमार, अभिमन्यु कुमार, मुकेश कुमार, चंदन कुमार आदि।
