पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 03 सितंबर। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 4886 किलोमीटर है। इसमें कुल 59 राष्ट्रीय राजमार्गों के खण्ड (सेगमेंट) बिहार से होकर गुजरते हैं। राज्य में कुल सड़कों की लंबाई का चार प्रतिशत राष्ट्रीय राजमार्गों का है। किंतु सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु में 44% मृत्यु राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं में होती है। राज्य के राजमार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का 78.44 प्रतिशत एन एच ए आई के अधीन राजमार्गों पर होती है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर Advance Traffic Management System (ATMS) के अधिष्ठापित होने के बाद ओवर स्पीडिंग पर होने वाली कार्रवाई के सुखद परिणाम दृष्टिगोचर हुए हैं। सड़क दुर्घटनाओं तथा उनसे होने वाली मृत्यु की दर में कमी अंकित की गई है। मुजफ्फरपुर – कोटवा ( मोतिहारी) राजमार्ग के 80 किलो मीटर के खंड पर 27/1/23 से 27/8/23 तक ओवर स्पीडिंग के मामले में 14744 चालान निर्गत किए गए। जिसके परिणति स्वरूप सड़क दुर्घटनाओं तथा उनसे होने वाली मृत्यु की दर में कमी आई है।
एन एच 319 बभनियाव-जगदीशपुर (आरा) के एक खंड पर दिनांक 29/1/23 से 24/8/23 ओवर स्डिंपीग के मामले में 863 चालान निर्गत किए गए। यहां भी सड़क दुर्घटनाओं तथा उनसे होने वाली मृत्यु की दर में कमी आई है। ATMS के अधिष्ठापन के उपरांत आने वाले उत्साह जनक परिणाम के दृष्टिकोण से गृह विभाग के द्वारा NHAI को पत्र प्रेषित कर सभी राजमार्गों पर ATMS अधिष्ठापित करने हेतू लिखा गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर यदि बिहार की स्थिति की बात की जाय तो वर्ष 2021 में सड़क परिवहन तथा राज्यमार्ग मंत्रालय के द्वारा जारी किये गये आंकङों के अनुसार वर्ष 2021 मे प्रति लाख जनसंख्या के आधार पर बिहार राज्य का स्थान 8वां, वर्ष 2020 में 15वें स्थान पर था। किंतु मृत्यु के दर के आंकङों के अनुसार बिहार 9वें स्थान पर है। वर्ष 2021में प्रति 10,000 वाहनों पर सड़क दुर्घटना की दर 15.1 है जबकि बिहार राज्य में यह दर 11.7 है। सङक दुर्घटनाओं के Severity Index के अनुसार यह दर 80 है जो राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान है।
सड़क सुरक्षा को देखते हुए राजमार्ग पर गश्त लगाने के उद्देश से राजमार्गों पर प्रति 50 किलोमीटर के विस्तार पर दो चरणों में Highway Patrol Cum Interceptor Vehicle प्रस्तावित है। 114 Highway Patrol Cum Interceptor Vehicle पर प्रति वाहन चार पुलिसकर्मी रहेंगे। इन वाहनों का लिंक डायल 112 (ERSS) के वाहनों से होगा।
राजमार्गों पर गश्त लगाने का उद्देश्य मोटर वाहन अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित कराना, आपातकालीन सेवा प्रदान करना और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखना है।
