
आरा/भोजपुर (अमरेश सिंह)03 सितंबर। शिक्षक दिवस विशेष शिक्षक सम्मान की कड़ी में आरा हाउसिंग कॉलोनी निवासी पूर्व प्राचार्य ब्लाइंड स्कूल ,आरा के जय प्रकाश पाठक ने अपने शैक्षणिक काल की चर्चा करते हुए कहा की आज भादो की चतुर्थी तिथि है और परसों शिक्षक दिवस भी।न जाने क्यों आज बचपन की कुछ स्मृतियां आंखों के आगे घूमे जा रही हैं।मुझे याद आ रहे वो दिन जब भादो की चतुर्थी तिथि को राज्य के लगभग सभी विद्यालयों में गणेश पूजा के साथ चकाचौंध शुरू होता था। प्रत्येक छात्र के हांथ में बरबट्टा होता था सभी शिक्षकों सहित सारे छात्र प्रत्येक छात्र के घर जाते थे।बच्चे चौकचंदा गाते।घरवाले छात्र की आंख मउंदआई होती। अभिभावक गुरू को कुछ दक्षिणा देते।बच्चों को कोई शंकर की मिठाई खिलाता तो कोई मोतीचूर की व्यवस्था रखता था।इस बात का खास ध्यान रखा जाता था की कि किसी छात्र का घर न छूटे अभिभावक भी सत्कार के लिए पूर्व से ही तैयार रहते।
प्रत्येक बच्चे की प्रथम गुरु उसकी मां होती है।उसके बाद एक अवस्था पर स्कूली शिक्षा आरम्भ होती है।हमारे संस्कार में विद्या आरम्भ के पूर्व खल्ली छुआने की परम्परा है।मेरे दादा जी पेशे शिक्षक थे उन्होंने मेरा हांथ पकड़ कर रामों गति देही सुमति लिखवाया था।
फिर मेरे माता पिता ने एक निजी विद्यालय में मेरा नाम लिखवा दिया।उस विद्यालय में दो क्लास की पढ़ाई होती थी।
मुझे घर से स्कूल ले जाने माधव रिक्शावाला आता था अन्य बच्चों के सांथ मुझे भी रिक्शे में ठूंसकर स्कूल ले जाता था। शुरू के दिनों में मैं स्कूल जाना नहीं चाहता था खूब रोता था।उस विद्यालय के प्रधानाचार्य स्व अनंत कुमार जैन थे। जिन्होंने अक्षर ग्यान के साथ साथ अहिंसा परमो धर्म का पाठ भी सिखाया।
शिक्षक दिवस पर पूज्य गुरुदेव के चरणों में बारम्बार नमन है। आज की तरह पेरेंट्स मीटिंग की कोई व्यवस्था नहीं थी। अभिभावक शिक्षक का सीधा संबंध होता था। गुरूजी का सामाजिक प्रतिष्ठा में अलग स्थान होता था।
आज सारी व्यवस्थाएं बदल चुकी है। राजकीयकरण के पश्चात शिक्षा के स्तर में गिरावट आती गई। विद्यालय वितरण केन्द्र बन गये।सुलभ शिक्षा महंगी होती गयी।कोचिंग संस्थानों की बाढ सी आ गयी।
