आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 05 अगस्त।फुटाब(फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो कन्हैया बहादुर सिन्हा सहित एक प्रतिनिधिमंडल बिहार के महामहिम राज्यपाल से जाकर मुलाकात की और अपनी समस्याओं को शालीनता से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल से बात करते हुए कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सहमति व्यक्त की और कहा की यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र बनाए रखा जाए साथ ही किसी को भी अनधिकृत हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
फेडरेशन के नेता प्रो कन्हैया बहादुर सिन्हा, कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि महामहिम ने आश्चर्य व्यक्त किया कि प्रोफेसरों के पद पर प्रोन्नति की सिफारिश करने वाली चयन समितियों में सरकार का प्रतिनिधि भेजने के लिए विश्वविद्यालयों को जिलाधिकारियों से संपर्क करना पड़ता है।समिति में चांसलर द्वारा नामांकित व्यक्तियों की सूची की समीक्षा करने पर भी सहमत हुए। प्रतिनिधिमंडल ने अधिनियम और परिनियमों के विरुद्ध कुलपतियों द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों से उन्हें अवगत कराया जिसे महामहिम ने गंभीरता से लिया।प्रो सिन्हा ने रीडर्स और सिलेक्शन ग्रेड लेक्चरर्स को प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नति देने संबंधी अपने न्यायिक आदेश सभी विश्वविद्यालयों को भेजने का अनुरोध किया।
उन्होंने बाल देखभाल अवकाश (चाईल्ड केयर लीव) कानूनों को लागू करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। जिसके अभाव महिला शिक्षकों को परेशानी हो रही है। उन्होंने ने कहा कि उन्हें बताएं कि उनका भाई उनके हितों की रक्षा के लिए यहां है।
उन्होंने आगे सरकार से बात करने का आश्वासन दिया कि मासिक वेतन और पेंशन भुगतान को नियमित होगा।शिकायत निवारण प्रणाली और पेंशन सेल को सुव्यवस्थित करने के लिए राजभवन के निर्देशों का गंभीरता से पालन नहीं करने पर विश्वविद्यालयों पर नाराजगी व्यक्त की।
प्रतिनिधिमंडल ने कुलाधिपति को शैक्षणिक सुधार के उद्देश्य से किसी भी प्रयास में सहयोग करने का आश्वासन दिया,जो काफी हद तक शिक्षकों की संलिप्तता और छात्रों की उपस्थिति पर भी आधारित है।
प्रत्येक विश्वविद्यालय को कक्षा में अच्छी संख्या में छात्रों को वापस लाने के बारे में चर्चा करने के लिए कार्यशालाएँ आयोजित करने का निर्देश देने के सुझाव को स्वीकार किया गया।

