नई दिल्ली/27 जुलाई।प्रधानमंत्री ने 26 जुलाई को प्रगति मैदान में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केन्द्र ‘भारत मंडपम’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर, संस्कृति मंत्रालय ने अपने संगीत नाटक अकादमी और क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के माध्यम से देशभर के लगभग 1250 कलाकारों की सहभागिता के साथ अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र नादस्वरम, थविल, पंचवाद्यम, चेंडा, डप्पू, लेज़िम, नासिक ढोल, गुजरात ढोल, छत्री, ढाक ढोल, नगाड़ा, शंख और घंटा आदि से जुड़े प्रदर्शन स्वागत कार्यक्रम का भाग बने और इसने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को उजागर किया। विद्या भारती स्कूल के 300 से अधिक बच्चों ने फ़ोयर प्रदर्शन के हिस्से के रूप में रवींद्रनाथ टैगोर का “आनंद लोके” गाया। मंच पर किए गए प्रदर्शनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और इसमें मलिक और समूह द्वारा ध्रुपद; भारतीय शास्त्रीय नृत्यों का संगम – भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी और ओडिशी; सिद्धि धमाल; ढोलू कुनिता; बिहू; बरेदी; पद्मश्री माधवी मुद्गल और समूह द्वारा ओडिशी नृत्य; मुखौटा नृत्य (पुरुलिया छाऊ); और कथक केंद्र के समूह कलाकारों और छात्रों द्वारा कथक नृत्य शामिल थे।प्रधानमंत्री के समक्ष ‘ओजस्वी’ की 15 मिनट की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति प्रस्तुत की गई, जिसका नृत्य शंकर महादेवन और रिकी केज- सूर्य, गणेश और नटराज के संगीत के आधार पर कोरियोग्राफ किया गया था और इसमें दिल्ली के संतोष नायर और उनके साद्या समूह द्वारा छऊ, कथक, ओडिशी, भरतनाट्यम और समकालीन नृत्य रूपों को शामिल किया गया। 
श्री नंदेश वत्सला विट्ठल उमाप (संगीत नाटक अकादमी युवा पुरस्कार विजेता) द्वारा पोवाड़ा या मराठी लोक गायन शैली में प्रस्तुत हिंदी भाषा में ‘धान्य भारतम’ गीत ने विभिन्न लोक और प्रमुख प्रदर्शन कला रूपों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 20 नर्तकों के साथ सभी को देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत कर दिया।देश के विभिन्न लोक और जनजातीय कला रूपों की विशेषता वाले लगभग 28 देशी प्रदर्शन भी आयोजित किए गए, जिससे भारत मंडपम के चारों ओर आनन्दोत्सव जैसा वातावरण बन गया।
इससे पूर्व, सुबह संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता चेतन जोशी और उनके समूह द्वारा किए गए हवन के बाद बांसुरी कलाकारों ने भी प्रस्तुति दी, जिसने आगामी कार्यक्रमों के लिए माहौल तैयार कर दिया। आमंत्रित कलाकारों में से लगभग 150 ने हवन में भाग लिया।

