
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 13 जुलाई।बिहार राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुटाब) ने शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के के पाठक की कार्यशैली पर पत्र लिख कर विश्वविद्यालयों और कौलेजों में सरकारी अधिकारियों को जांच हेतु भेजे जाने को विश्वविद्यालय अधिनियम के विरुद्ध बताया है। प्रो सिन्हा ने कहा की विश्वविद्यालय प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। लेकिन जब तक हितधारकों से परामर्श नहीं किया जाता तब तक स्थायी निदान नहीं हो सकता ।एक विभाग अपना निर्धारित कार्य समय पर नहीं कर दूसरों पर दोषारोपण कर रहा है।
विश्वविद्यालयों को कभी गंभीर आरोप,ऑडिट आपत्ति या गठित वेतन निर्धारण समिति से प्राप्त नहीं हुई फिर सैकड़ों शिक्षक और कर्मचारी अपनी पात्रता से अधिक वेतन कैसे ले रहे हैं।यह शिक्षकों की छवि खराब करने का प्रयास है। सैकड़ों शिक्षकों को केवल 75% वेतन और एरियर मिल रहा है।धारा 30 के तहत सरकार को निर्धारित समय के भीतर परीक्षा की तारीखें तय करने और परिणामों के प्रकाशन का अधिकार देता है।
तब इतने सालों तक सरकार कहां थी? सरकार अनियमित और विलंबित शैक्षणिक सत्र की जिम्मेदारी क्यों नहीं ले सकती? एक वीसी के पास दो से चार विश्वविद्यालयों का प्रभार है. रजिस्ट्रार, एफए और एफओ को भी एक से अधिक विश्वविद्यालयों का प्रभार दिया गया है।
अपनी गलतियों पर पर्दा डालना और विश्वविद्यालयों की सभी बुराइयों के लिए शिक्षकों को दोषी ठहराना आजकल का चलन बन गया है
17/6/23 को 330 करोड़ रुपये का आवंटन पत्र जारी किया गया लेकिन राशि रिलीज़ रोक दिया।शिक्षा जैसे संवेदनशील विभाग को नाजुक ढंग से संभालने की जरूरत है।यहां-वहां निरीक्षण दिखावटी कार्रवाई है ।
प्रतिशोध की भावना से कार्य करनेवाले न तो सही रास्ता चुनते हैं और न ही लक्ष्य हासिल कर पाते हैं।

