
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 10 जुलाई।प्राचीन काल से आरा को धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है।मां आरण्य देवी मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर, बुढ़वा महादेव मंदिर,बाबा बरमेश्वर नाथ ब्रह्मपुर मंदिर,आदि का धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है।सावन माह सबसे पवित्र और बाबा भोलेनाथ, मां पार्वती को जलाभिषेक कर खुश करने, मनोवांछित फल प्राप्ति का सबसे उत्तम महिना होता है। मां पार्वती भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया तब जाकर भगवान शंकर की प्राप्ति हुई थी। ऐसी मान्यता है की कुंवारी लड़कियां भगवान शंकर को पवित्र मन से,शुद्ध जल, बेलपत्र, फल फूल चढ़ाकर तथा सोमवार का व्रत कर सुंदर वर की प्राप्ति कर सकती है। समुंद्र मंथन से प्राप्त विष को जगत के कल्याण के लिए भगवान शिव ने विष का पान किया और नीलकंठ बन गए।भगवान भोलेनाथ कैलाश पर्वत से पृथ्वी पर आकर भक्तों का कल्याण करते हैं इसलिए सावन माह में पूजा का विशेष महत्व है।
शहर का वक्षस्थल महादेवा में बुढ़वा महादेव उर्फ बाबा जागेश्वर नाथ का प्राचीन मंदिर है, मुहल्ले का नाम भी बाबा के नाम पर आदिकाल से चला आ रहा है। अब मंदिर भव्य और दर्शनीय बन चुका है। सावन के प्रथम सोमवारी पर प्रातः काल चार बजे मंदिर की सफाई के बाद पुजारी रमाकांत गिरी द्वारा बाबा पर जलाभिषेक कर पूजा का शुभारंभ हुआ। तत्पश्चात भक्तों द्वारा जलाभिषेक प्रारंभ हुआ,घंटियों की टनटनाहट हर हर महादेव का जय घोष होने लगा ।यही कार्य लगभग दिन भर होते रहा।लोग पंक्तिबद्ध होकर जलाभिषेक करने में लगे रहे।इस कार्य में महिलाएं भी पीछे नहीं रही बल्कि बढ़-चढ़कर पूजा में लीन रही।

जलाभिषेक के लिए स्वयंसेवक मंदिर के पवित्र कुआं से जल निकालकर भक्तों को देने में लगे रहे। कई पुजारी ललाट पर चंदन लगाते दिखे। इसके लिए भी मंदिर में पुरुष महिलाओं की भीड़ देखी गई। श्रद्धालु भक्तों को कोई असुविधा नहीं हो इसके लिए पुलिस प्रशासन मोड़ से गाड़ियों का,दो पहिए वाहनों का आवागमन रोक दिया है। पुरुष और महिला अलग-अलग कतार में पूजा के लिए गर्भ गृह में जा रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन लगा हुआ है।
समिति के लोग मंदिर की साफ-सफाई ,भीड़ पर नियंत्रण, असामाजिक तत्वों पर ध्यान, आदि के लिए पूरी तरह से लगे है। समिति के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष शंकर जी केशरी तथा कोषाध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद केसरी एक दिन पूर्व से ही बैठक कर सारी व्यवस्था की है।अन्य सक्रिय सहयोगी में मंगरु केसरी, कुंदन जी, शंकर जी आदि है।


