
RKTV NEWS/रवींद्र पांडेय 10 जुलाई। माई डियर टमाटर जी। आप टमाटर हैं। टमाटर ही बने रहिए। इसी में आपका फायदा है। याद रखिए। केवल लाल होने से आप सेव नहीं हो जाते। दो-चार लोग टोकरी में सजाकर आपका गिफ्ट पैक क्या बनवा लिए, आप खुद को सेलेब्रिटी समझ बैठे। लोग नासमझ नहीं हैं। कोई बाप अपनी बेटी के घर पांच किलो टमाटर लेकर नहीं जाएगा। वह सेव ले जाएगा। संतरा ले जाएगा। अनार ले जाएगा। टमाटर तो कतई नहीं ले जाएगा। आपको मालूम है न कि क्यों नहीं ले जाएगा? नहीं मालूम है, तो जान लीजिए। सोसायटी में उसकी नाक कट जाएगी। और नाक केवल उसी की नहीं कटेगी, जो टमाटर लेकर जाएगा। नाक उसकी भी कटेगी, जिसके यहां कोई टमाटर गिफ्ट में लेकर जाएगा। उसकी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। वह तो यही सोचेगा कि गिफ्ट लानेवाला खुद को कुबेर मान रहा है और हमें कंगला समझ बैठा है। हमारे दिन क्या इतने गिर गए कि हमें टमाटर भेंट किया जा रहा है। परंपरा भी कोई चीज होती है। गिफ्ट में फल देने की परंपरा है। सब्जी देने की नहीं। आप फल नहीं हैं। महोदय, गलतफहमी मत पालिए। अपने डाइनिंग टेबल पर कोई भी आपको टोकरी में सजाकर नहीं रखनेवाला। लोग केला रख लेंगे। अमरूद रख लेंगे। टमाटर तो नहीं रखने वाले। फालतू फंड के मत इतराइए। मीडिया वालों के मायाजाल के भ्रम से बचिए। हम देख रहे हैं।
बहुत स्टाइल मार रहे हैं कैमरा देखकर। एंगिल बदल-बदल कर फोटो खिंचवा रहे हैं। यकीन मानिए। हर एंगिल के फोटो में आप टमाटर ही दिखते हैं। आपको देखकर जी नहीं ललचाता। मुंह में पानी भी नहीं आता। इसलिए ज्यादा फुदकिए मत। खुशी में और लाल मत होइए। क्योंकि लाल होने के बाद पिलपिला होने में देर नहीं लगती। फ्रिज के भरोसे वाली लालिमा हफ्ते भर से ज्यादा टिकती नहीं। अच्छा एक बात बताइए- आपकी असली कीमत क्या है? बीस रुपए किलो। चालीस रुपए किलो। साठ रुपए किलो। एक सौ बीस रुपए किलो। अब देखिए, हंसिए मत। हमें पता है, आपको क्यों गुदगुदी क्यों हो रही है? आप हमें बुद्धू समझ रहे हैं। आजकल हर कोई आपके भाव पाव में पूछ रहा है। और मैंने किलो में पूछने की हिमाकत की है। आपकी नजर में यह मेरी मूर्खता है। आपके चक्कर में यूट्यूब वाले अलग टेंशन में हैं। टमाटर से बननेवाले व्यंजन कम सर्च किए जा रहे हैं। व्यूवरशिप घट गई है उनकी। असली नुकसान तो उनका हो रहा है। चलिए। अब कर भी क्या सकते हैं? बिना टमाटर डाले टमाटर से स्वादिष्ट व्यंजन की वीडियो परोसिए। लोग ढूंढ़ रहे हैं। चलिए। यह सब तो चलता रहेगा। वैसे, चार दिन की चांदनी के बाद अंधेरी रात भी आ ही जाती है। आपको भी अपनी औकात पता ही है। नई फसल आते ही आप रोड पर आ जाएंगे। अभी जो आपके पाव वाले भाव हैं, उसी भाव पर पसेरी में भी आपको कोई नहीं पूछनेवाला। आप टोकरी से बोरी में आ जाएंगे। पर टेंशन मत लीजिए। कैमरा वाले तब भी आपकी फोटो लेंगे। तब एंगल आपका नहीं होगा। कैमरा वालों का होगा।



