
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)23 सितंबर।इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल द्वारा मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से आयोजित 13वें भोपाल विज्ञान मेला-2026 , में मध्य प्रदेश की अगरिया जनजाति के पारंपरिक “लौह-प्रगलन “ कौशल का जीवंत प्रदर्शन किया गया है। “लोहे के प्रगलन की पारंपरिक तकनीक का जीवंत प्रदर्शन” विषय पर आधारित यह प्रदर्शन 22 से 26 सितंबर 2026 तक बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित किया गया है।
प्रदर्शन का उद्देश्य पारंपरिक समुदायों द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित लौह-प्रगलन की तकनीक, स्थानीय ज्ञान और स्वदेशी वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आमजन, विद्यार्थियों एवं विज्ञान प्रेमियों के समक्ष प्रस्तुत करना है।
संग्रहालय के निदेशक प्रो डा अमिताभ पांडे ने बताया कि,अगरिया समुदाय परंपरागत रूप से लौह अयस्क से लोहे के निर्माण की तकनीक के लिए जाना जाता है। इस प्रदर्शन में आग, भट्ठी, कोयला तथा स्थानीय संसाधनों के उपयोग से लौह-प्रगलन की पारंपरिक प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से मानव संग्रहालय के तत्वावधान में समझाया जा रहा है।
प्रदर्शनी के समन्वयक मानव संग्रहालय के अधिकारी डॉ. प्रीतम चौधरी ने बताया कि जीवंत प्रदर्शन के माध्यम से दर्शकों को यह जानने का अवसर मिल रहा है कि आधुनिक तकनीकी संसाधनों के अभाव में स्थानीय समुदायों ने प्रकृति, संसाधनों और अनुभवजन्य ज्ञान के आधार पर किस प्रकार उपयोगी तकनीकों का विकास किया। यह आयोजन पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है।
मानव संग्रहालय के जन संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि,इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा आयोजित आगरिया जनजाति के इस पारंपरिक लौह प्रगलन तकनीकी के प्रदर्शन से आगरिया जनजाति के पारंपरिक तकनीकी ज्ञान, लौह अयस्क को छू कर एवं सूंघ कर पहचानना, लोहे को गलाने के लिए आवश्यक तापमान उत्पन्न करना आदि ,जनजातीय संस्कृति और भारत की समृद्ध लोक-वैज्ञानिक विरासत को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया गया है।
