बड़हरा में माले ने चलाया बाढ़ राहत अभियान

आइसा व आरवाइए का राहत अभियान जारी।
RKTV NEWS/आरा(भोजपुर)23 सितंबर।बड़हरा के सरैया व पश्चिमी गुड़ी पंचायत में भाकपा-माले व छात्र-युवा संगठन आइसा-आरवाइए ने आज लगातार तीसरे दिन बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया. बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित प्रखंड बड़हरा के बभनगांवा, सरैया व गुड़ी गांवों में ज़रूरतमंद ग्रामीणों के बीच आज राहत टीमें पहुंची और खाद्य सामग्री का पैकेट वितरण किया. इन पैकेटों में चावल, दाल, आलू, गुड़, बिस्किट व माचिस आदि शामिल हैं.
इस मौके पर भाकपा-माले जिला सचिव अभ्युदय ने कहा कि बिहार में बाढ़ की आपदा से हर साल होने वाली भारी क्षति के लिए प्रकृति से ज़्यादा सरकारी उदासीनता और राहत के नाम पर लूट का स्थापित तंत्र जिम्मेदार है. इससे निपटने में सरकार की विफलता तब आपराधिक ही कही जाएगी जब इस साल जिले के 25 से ज़्यादा लोग समुचित बचाव कार्यों के अभाव में डूब कर मर गए हैं. 25 से ज़्यादा लोगों की बाढ़ में डूबकर मौत हो चुकी है और दर्जनों घर कटाव में समा चुके हैं. बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों के घर, सड़क, विद्यालय, कृषि भूमि एवं आजीविका प्रभावित हुई है तथा जान-माल की गंभीर क्षति हुई है पर सरकार के प्रयास दिखावे भर के हैं.
राहत टीम का नेतृत्व भाकपा-माले के पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन, राज्य स्थाई समिति सदस्य संगीता सिंह, बड़हरा प्रखंड सचिव नंदजी, कोईलवर प्रखंड सचिव बिष्णु ठाकुर, जिला कार्यालय सचिव दिलराज प्रीतम, आइसा जिलाध्यक्ष विकास कुमार, आइसा जिला सचिव जयशंकर प्रसाद, आरवाइए जिलाध्यक्ष विशाल कुमार, अप्पू यादव, रौशन कुशवाहा, अखिलेश गुप्ता, साहिल अरोरा, दीपक रवानी, विवेक कुमार, नीतू कुमारी, मुस्कान कुमारी, सन्नी देवल, वर्षा कुमारी, संस्कतमा, छोटी, अमित यादव, प्रदीप कुमार, विवेक यादव, सुमित कुमार, चंदन दास,अनूप कुमार, गोलू कुमार, कमेन्द्र कुमार, मंगल राम, गौतम यादव, दुर्गेश रजक,संजय गुप्ता,शशिकांत,सुनील कुशवाहा, रामबाबू, प्रिंस कुमार आदि कर रहे थे.
राहत अभियान का नेतृत्व कर रहे भाकपा-माले के पूर्व विधायक व राज्य स्थायी समिति सदस्य संगीता सिंह ने कहा कि भोजपुर के कमोबेश 10 प्रखंड बाढ़ व कटाव की आपदा झेल रहे हैं. सभी बाढ़ पीड़ितों को मुआवज़े की राशि व फसल क्षति मुआवज़ा नहीं मिल रहा है. सार्वजनिक रसोई व मेडिकल कैंप काम नहीं कर रहे हैं. जान माल की भारी क्षति के बीच सरकारी तंत्र आम तौर पर बेफिक्र बना हुआ है. उन्होंने कहा है कि बिहार की डबल इंजन सरकार ने प्रधानमंत्री के जन्मोत्सव का दिया पर्व मनाने में हज़ारों करोड़ रुपए खर्च करना ज़रूरी समझा और बाढ़ में मर रहे लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया.
15 दिनों के इस बाढ़ राहत अभियान में भाकपा – माले की प्रखण्ड कमिटियों और आइसा व आरवाइए की टीमों के ज़रिए भोजपुर के आम नागरिकों व छोटे व्यवसायियों से राहत कोष संग्रह किया गया है.
भाकपा-माले ने सरकार से निम्नलिखित मांगों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है
*राहत वितरण अनियमितता :* प्लास्टिक किट व अन्य सामग्री के वितरण में भेदभाव और अनियमितता की जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और वितरण पारदर्शी हो.
*मुआवजा:* बाढ़ में मृत सभी लोगों (25+) के आश्रितों को ₹20-20 लाख दिए जाएं और छूटे मृतकों की पहचान के लिए विशेष सर्वे हो.
*छूटे परिवार:* मुआवज़ा सूची से छूटे सभी परिवारों को जांच कर जोड़ा जाए और अनुग्रह राशि दी जाए.
*खाद्यान्न:* हर प्रभावित परिवार को कम-से-कम तीन माह का खाद्यान्न और आवश्यक सामग्री मिले.
*बिजली बिल:* बाढ़ अवधि के घरेलू बिजली बिल माफ हों।
सड़कें व पुल: भोजपुर की 56 जलमग्न सड़कों (PWD की 5, ग्रामीण कार्य प्रमंडल, आरा की 51) और पुल-पुलियों की तकनीकी जांच व तत्काल मरम्मत हो.
*स्कूल:* स्कूलों की तत्काल सफाई, मलबा निकासी और क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत हो.
*फसल क्षति:* बटाईदारों सहित सभी किसानों का निष्पक्ष सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए.
पिपरपांती (बड़हरा): 14 सितंबर की रात घरों के ढहने की जांच हो और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता व सुरक्षित पुनर्वास मिले. गंगा में विलीन हुए या होने की कगार पर खड़े 7 गरीब परिवारों को 5 डिसमिल जमीन और आवास हेतु ₹2.5 लाख दिए जाएं.

