
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)01 सितंबर।आनंद कंद भगवान के ठाकुरबाड़ी प्रांगण में आयोजित रागाभोग कार्यक्रम में सुविख्यात तबला वादक डॉ. लाल बाबू निराला ने तबला वादन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया । इस अवसर पर डॉ. लाल बाबू निराला ने दीप प्रज्ज्वलित करते हुए कहा कि शास्त्रीय संगीत से संस्कार का निर्माण होता है । संगीत में ताल को प्राण कहा गया है । तबला संगत संसार का प्रमुख वाद्य है इसके बिना संगीत प्राण विहीन है । इस अवसर पर लाल बाबू निराला ने तीनताल में उठान, चलन, कायदा, रेला व क्लिष्ट लयकारियों द्वारा वादन से दर्शकों को खासा प्रभावित किया । वही गुरु बक्शी विकास ने राग मारू विहाग की ठुमरी सैयां तूने झगड़े में रैन गवाई प्रस्तुत कर समां बांध दिया । इस अवसर पर रंगकर्मी कृष्नेंदु व जन्मजय ओझा ने तबला वादक निराला को स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया । मंच संचालन अमित कुमार व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. किरण कुमारी ने किया ।
