आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 05 जुलाई। प्राचीन काल से आरा को धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है।पौराणिक कथा में इसका चर्चा है। मां आरण्य देवी मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर, बुढ़वा महादेव मंदिर,बाबा बरमेश्वर नाथ ब्रह्मपुर मंदिर,आदि की धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है। वैसे तो सावन माह सबसे पवित्र और बाबा भोलेनाथ, मां पार्वती को जलाभिषेक कर खुश करने, मनोवांछित फल प्राप्ति का महिना होता है। मां पार्वती भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर कब किया तब जाकर भगवान शंकर की प्राप्ति हुई थी। ऐसी मान्यता है की कुंवारी लड़कियां भगवान शंकर को पवित्र मन से शुद्ध जल, बेलपत्र, फल फूल चढ़ाकर तथा सोमवार का व्रत कर सुंदर वर की प्राप्ति कर सकती है। समुंद्र मंथन से प्राप्त विष को जगत के कल्याण के लिए भगवान शिव ने विष का पान किया और नीलकंठ बन गए। इसी माह में भगवान भोलेनाथ कैलाश पर्वत से पृथ्वी पर विचरण करने आते हैं और श्रद्धालु भक्तों का कल्याण करते हैं। इसलिए सावन माह में पूजा का विशेष महत्व है।
इसी कड़ी में शहर का वक्षस्थल महादेवा, यहां बुढ़वा महादेव उर्फ बाबा जागेश्वर नाथ का प्राचीन मंदिर है,इस मुहल्ले का नाम भी बाबा के नाम पर आदिकाल चला आ रहा है। अब इस मंदिर का जीर्णोद्धार हो गया है और दर्शनीय स्थल बन चुका है। सावन के प्रथम दिन पर प्रातः काल चार बजे मंदिर की सफाई के बाद पुजारी रमाकांत गिरी ने बाबा पर जलाभिषेक कर पूजा का शुभारंभ हुआ। तत्पश्चात भक्तों का आना जाना शुरू हो गया। घंटियों की आवाज दूर-दूर तक सुनाई देने लगी ।बोल बम, हर हर महादेव का जय घोष होने लगा है यही कार्य लगभग दिन भर होते रहा।लोग पंक्तिबद्ध होकर जलाभिषेक करने में लगे रहे।इस कार्य में महिलाएं भी पीछे नहीं है बल्कि बढ़-चढ़कर पूजा में लीन रही। सावन दो माह का होने के कारण शहर भी दो माह भक्ति भावना से ओतप्रोत रहेगा।
समिति के लोग मंदिर की साफ-सफाई ,भीड़ पर नियंत्रण, असामाजिक तत्वों पर ध्यान, आदि के लिए पूरी तरह से लगा हुआ है पुलिस प्रशासन को भी मदद के लिए सूचित किया गया है सीसीटीवी कैमरा और पुरुष महिलाओं के लिए अलग से आने जाने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान समिति में राजेंद्र कुमार अध्यक्ष, शंकर जी केशरी उपाध्यक्ष तथा विश्वनाथ प्रसाद केसरी कोषाध्यक्ष हैं। अन्य सक्रिय सहयोगी में मंगरु केसरी, कुंदन जी, शंकर जी, आदि है।


