
RKTV NEWS/पटन(बिहार)05 जून। बिहार के सड़क बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और निजी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से पथ निर्माण विभाग के द्वारा राज्य में सड़क परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण प्रस्ताव पर स्टेकहोल्डर के साथ परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परामर्श बैठक का मुख्य उद्देश्य निजी क्षेत्र के निवेशकों और हितधारकों को बिहार के सड़क बुनियादी ढांचे के विकास में भागीदारी के अवसरों को तलाशने के लिए आमंत्रित करना है, जिससे राज्य की आर्थिक गति को और अधिक बल मिल सके।
वर्तमान में बिहार सरकार के स्वामित्व में 3,617 किलोमीटर राजकीय राजमार्ग, 16,784 किलोमीटर मुख्य जिला सड़कें और लगभग 1.29 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें हैं। सड़क नेटवर्क का व्यापक विकास और इसके प्रभावी रखरखाव के कारण राज्य में यात्रा के समय में भारी कमी आई है।
सचिव ने कहा कि बिहार प्रदर्शन-आधारित सड़क संपत्ति रखरखाव प्रणाली (Performance-based Maintenance System) को लागू करने में देश का अग्रणी राज्य है। वर्तमान में, पथ निर्माण विभाग अपने प्रदर्शन-आधारित अनुबंध OPRMC के तहत 19,305 किलोमीटर सड़क नेटवर्क के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीक को एकीकृत किया जा रहा है।
बिहार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2024-25 का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में बढ़ते डिस्पोजेबल आय और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के कारण वाहनों के स्वामित्व में भारी उछाल आया है। पिछले सात वर्षों में बिहार में वाहन पंजीकरण की वार्षिक विकास दर लगभग 6% रही है। वर्ष 2011 से 2024 के बीच परिवहन और संचार क्षेत्र में बिहार ने 7.6% की विकास दर दर्ज की है, जो उत्तर प्रदेश (10.1%) और कर्नाटक (7.7%) के बाद देश में तीसरे स्थान पर है।
सड़क संपत्ति मुद्रीकरण के प्रथम चरण में लगभग 3,000 किलोमीटर राजकीय राजमार्गों और 40 से अधिक पुलों की पहचान की गई है।
कंसल्टेशन मीट के दौरान उपस्थित प्रतिनिधियों के द्वारा उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का अनुभव साझा करते हुए बताया गया कि बिहार में ‘टोल ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ मॉडल, बेस रेट, रेवेन्यू शॉटफॉल , ट्रैफिक सर्वे, लोगों में टोल की राशि देने पर जागरूकता तथा परिसंपत्ति मुद्रीकरण की नई पद्धति को लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
