अश्रुपूरित नेत्रों और जयकारों के साथ ग्रामवासियों ने दी श्री जीयर स्वामी जी महाराज को विदाई।
दिनारा/रोहतास ( डॉ अजय ओझा वरिष्ठ पत्रकार)3 जून। हल्की बूंदाबांदी और बरसात के फुहारों के बीच मउडिहरा गांव में श्री जीयर स्वामी जी महाराज के मंगलानुशासन में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का सुखद समापन हुआ। ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन मौसम की प्रतिकूलता और बारीश के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई और कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और मंगलकारी अनुष्ठान है। इसे साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप माना गया है। सात दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में ज्ञान, कर्म और भक्ति का त्रिवेणी संगम होता है।
यह आयोजन सांसारिक मोह-माया से मुक्ति और परमपिता परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ की महिमा का बखान करते हुए पूज्य स्वामी जी ने कहा कि शुकदेव मुनि जी के अनुसार, इस ज्ञान यज्ञ के श्रवण मात्र से अशांत जीवन शांत हो जाता है और जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। सुबह में आरती संपन्न करने के बाद लगभग पच्चीस भक्तों को श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने गुरुदीक्षा दिया।
उधर काशी से पधारे कथावाचक पूज्य श्री विश्वकांताचार्य जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के सातवें और अंतिम दिन की कथा का समापन करते हुए भगवान कृष्ण का मथुरा गमन, कंस वध, द्वारिका चरित, सुदामा आख्यान का सांगोपांग वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण कथा श्रवण का अक्षय फल प्राप्त होता है। उन्होंने भगवान कृष्ण और ब्रज की गोपियों के बीच के दिव्य वियोग और अनन्य प्रेम का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण जब मथुरा चले गए, तो गोपियाँ उनके वियोग (विरह) की तीव्र पीड़ा में डूब गईं। यह प्रेम और भक्ति की सर्वोच्च अवस्था है, जिसे ‘महाभाव’ भी कहा जाता है। गोपी विरह का सबसे प्रामाणिक और भावुक वर्णन श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कंध में ‘गोपी गीत’ के रूप में मिलता है।
इसमें गोपियाँ कृष्ण के वियोग में व्याकुल होकर यमुना के तट पर उनकी स्तुति करती हैं। श्री विश्वकांताचार्य जी महाराज ने गोपी विरह का मार्मिक चित्रण करते हुए गोपियों के विरह, उनकी व्यथा और कृष्ण के प्रति उनके अटूट प्रेम को दर्शाते हुए कहा कि गोपियों का विरह साधारण दुःख नहीं, बल्कि एक दिव्य आनंद की स्थिति है जहाँ उनका मन हर पल कृष्ण की याद में लीन रहता है। गोपियों का यह अद्वितीय प्रेम ही कलि काल के जीवों के लिए भक्ति का परम आदर्श है। उनका यह विरह ही नित्य मिलन का आधार है, क्योंकि वे क्षण भर के लिए भी कृष्ण से अलग नहीं रह सकतीं। उनका यह भाव प्रेम की पराकाष्ठा है। महाराज जी ने जब गोपियों की व्यथा को “तुम्हारी याद आती है बताओ क्या करें मोहन” भजन में पिरोते हुए गाया तो उपस्थित श्रोता भावविह्वल होकर रोने लगे।
कथा समाप्ति के बाद उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने यज्ञ समिति द्वारा आयोजित भंडारे में भोजन और प्रसाद ग्रहण किया। ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन स्थानीय विधायक आलोक कुमार सिंह भी श्री जीयर स्वामी जी महाराज के दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने स्वामी जी का दर्शन करने के बाद प्रसाद भी ग्रहण किया। संध्या में अचानक आई बरसात और बूंदाबांदी के बीच सभी ग्रामवासियों ने अश्रुपूरित नेत्रों और जयकारों के साथ श्री जीयर स्वामी जी महाराज को विदाई दी। श्री जीयर स्वामी जी महाराज भोजपुर जिले के अखगांव में आयोजित ज्ञान यज्ञ स्थल की ओर रवाना हो गए।
जनार्दन ओझा, दीनानाथ ओझा, रामापति ओझा, महेन्द्र नाथ ओझा, सर्वदेव ओझा, राजगृही ओझा, रामजी ओझा, डॉ पारसनाथ ओझा, तेज नारायण ओझा, भूलन ओझा, अरविंद कुमार, रास गोविंद ओझा, सत्येन्द्र ओझा, पप्पन ओझा, जयकुमार उपाध्याय, विनोद ओझा, दीनानाथ पासवान, श्याम बिहारी पासवान लगातार ज्ञान यज्ञ की सफलता के लिए लगे रहे। मीडिया प्रभारी डॉ अजय ओझा ने दिनारा प्रखंड के सभी पत्रकार बंधुओं को ज्ञान यज्ञ की खबरों के विस्तृत कवरेज के लिए धन्यवाद दिया।

