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BRICS मंच पर बिहार की आपदा प्रबंधन उपलब्धियों की गूंज।

बाढ़ प्रबंधन, पूर्व चेतावनी प्रणाली एवं सामुदायिक लचीलापन के बिहार मॉडल को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना।

RKTV NEWS/पटना/पुरी, 3 जून।भारत की BRICS अध्यक्षता-2026 के अंतर्गत ओडिशा के पुरी में आयोजित तीन दिवसीय BRICS Disaster Risk Reduction (DRR) Working Group की तकनीकी बैठक में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत ने बिहार में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, बाढ़ प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन तथा सामुदायिक आपदा तैयारी के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों एवं उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।
3 से 5 जून तक आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, ईरान एवं इंडोनेशिया सहित 11 BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ तथा तकनीकी संस्थानों के अधिकारी भाग ले रहे हैं। बैठक में सतत आपदा जोखिम वित्तपोषण, जलवायु-सहिष्णु अवसंरचना, पूर्वानुमान आधारित कार्रवाई, सामुदायिक पूर्व चेतावनी प्रणाली तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक आपदा प्रबंधन में समाहित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
अपने संबोधन में डॉ. उदय कांत मिश्र ने कहा कि बिहार ने तकनीक, वैज्ञानिक पूर्वानुमान और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से आपदा प्रबंधन का प्रभावी मॉडल विकसित किया है। उन्होंने बताया कि राज्य की उन्नत बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली अब 72 घंटे से अधिक पहले चेतावनी जारी करने में सक्षम है। उन्होंने सामुदायिक जागरूकता, विद्यालय सुरक्षा, स्थानीय स्वयंसेवकों की भूमिका तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण में किए गए आधुनिक तकनीकी नवाचारों की जानकारी साझा की। साथ ही बाढ़, वज्रपात एवं अन्य आपदाओं के पूर्व चेतावनी हेतु विकसित किए जा रहे पहनने योग्य चेतावनी उपकरण का उल्लेख किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से बढ़ती चुनौतियों के बीच BRICS देशों के बीच ज्ञान एवं तकनीक के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि भविष्य का आपदा प्रबंधन विज्ञान, नवाचार, पर्यावरणीय संतुलन और जनभागीदारी पर आधारित होगा।
उन्होंने शहरी बाढ़ प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, तथा नई पीढ़ी की आपदा तैयारी पर भी अपने विचार रखे और कहा कि अगली पीढ़ी की आपदा प्रतिरोधक क्षमता केवल तटबंधों और आश्रय स्थलों से नहीं बनेगी, बल्कि उसमें पारिस्थितिकी, तकनीक, सामुदायिक मनोविज्ञान, सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक विश्वास का भी समावेश आवश्यक होगा।
बैठक के दौरान बिहार द्वारा प्रस्तुत बाढ़ प्रबंधन, पूर्व चेतावनी प्रणाली, जलवायु अनुकूलन एवं सामुदायिक सहभागिता आधारित पहलों को विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, आयोजन समिति तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा सराहा गया। प्रतिभागियों ने बिहार के अनुभवों और नवाचारों को अन्य राज्यों एवं देशों के लिए अनुकरणीय बताते हुए उसे अपने देश में भी आजमाने में रुचि व्यक्त की। इस आयोजन में प्राधिकरण के वरीय शोध पदाधिकारी दीपक कुमार भी उपस्थित रहे।

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