
सल्फर (होमियोपैथी)
ले ल सल्फर के दवईया, इहे जीवन के रखवैया, चिन्ह ल सल्फर के निशानी, कइसे होला इ खेवैया।
दुबर होइहें, पातर होइहें, कुबड़ लेखा झुकल होइहें, दाढ़ी-नोह बढ़वले रखीहें, भिनभिनात कपड़ा के पेन्हि हैं।
फाटल ओढ़न-डासन रखीहें, टुटल बटन खुले ही रखीहें, दिने-रात पढ़ते हीं रहीहैं, तनिको काम ना देहि से करीहैं।
कबहुँ नाहीं नेहाइल चहिहें, संक्राति दिनवो भूल जइहें, धधकत आँच अस जरत रहीहैं, माथा से योनी तक खजुलइहें।
सुतल गजबे उनकर, गोड़ बिस्तर चादर से रखीहें बाहरी, ना रह पइहें खड़ा देर तक, उठ-बइठ के घुमीहे सगरी।
छोड़ते खाट ही भोरे भगीहें, पैखाना के भीतर, धोती होई खराब देरी पर, डरते रहीहें भीतर-भीतर।
छटपट करीहें, जबे बजी 11 दिन में, आपन पेट के भूखे, दर्द उठी माथा में हप्ता पर, चक्कर आयी जब उ दुखे।
हवा लगते छींके लगीहें, होई नाक बंद घरवा के भीतर, लाले लागी, बदबु रही बाँया कान, घंटा बाजी ओकर भीतर।
डुबते सूरज औंधी झोंकी, बाकी रात सपनाते उ रहीहें, देख भूत सपना में डरीहें, चढ़ी घाम घरी सुतल रहीहैं।
लागते बुखार प्यासे छपटइहें, कंपकंपी में पानी ना भायी,
खजुलइला पर अच्छा लागी, जबतक लहर जलन ना पायी। कल्केरिया पहिले मत लीह, नाहीं त रोगवा बिगड़े लागी,
बार-बार मत दीह इनका के, नाहीं त सुतल रोगवा बनबन जागी। नया रोग में एको० जइसे, भइल पुरान त सल्फर दीह,
नक्स-सल्फर कल्केरिया-लाइको एहि क्रम में दीह।
सल्फर रहीहें जतना गन्दा, अर्सेनिक ओतने फरछीन, इनकर जलन ठंढ से जइहें, गरम से आर्सेनिक इहे बा भिन्न।

