
शाहपुर/भोजपुर (राकेश मंगल सिन्हा) 16 जुलाई। वरिष्ठ समाजवादी नेता, पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री शिवानंद तिवारी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक तथा उनके साथियों द्वारा किये जा रहे अनिश्चितकालीन उपवास पर केन्द्र सरकार के उदासीन रवैये पर चिंता जताते हुए उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह केंद्र सरकार से किया है। उन्होंने कहा कि देश के तमाम विपक्षी दलों को लोकतंत्र की इस आवाज के साथ खङा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। वे असाधारण प्रतिभा के धनी, सामाजिक कार्यकर्ता, जननेता, पर्यावरणविद तथा वैज्ञानिक हैं। उन्होंने लद्दाख जैसे कठिन भूभाग मे बर्फ से कृत्रिम हिमनद (आइस स्तूप) बनाकर सिंचाई की नई व्यवस्था विकसित की। उन्होंने सैनिकों के लिए ऐसे आवासों के निर्माण मे योगदान दिया जहाॅ बाहर की तुलना मे तापमान अधिक अनुकूल रहता है। उनके अनेक नवाचारों ने पूरे देश और दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। उनके कार्यों से प्रेरित होकर लोकप्रिय फिल्में भी बनीं। पूर्व सांसद तथा पूर्व मंत्री शिवानंद तिवारी ने कहा कि चीन की सीमा से लगे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र मे रहने वाला ऐसा व्यक्ति जब लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करता है तो उसकी आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए क्योंकि उनकी मांगें भी कोई असंगत या अव्यवहारिक नहीं हैं। वे लद्दाख के लोगों के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा अथवा पर्याप्त लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। लद्दाख, लेह और कारगिल के लोगों के लिए लोकसभा मे प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। उनकी आबादी और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप राजनीतिक अधिकार मिले, इसमें आपत्ति की क्या बात है। लोकतंत्र केवल चुनाव कराने का नाम नहीं है बल्कि जनता द्वारा चुनी गई सरकार को वास्तविक अधिकार देना ही लोकतंत्र का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि कश्मीर मे भी चुनाव हुए, सरकार बनी लेकिन चुनी हुई सरकार और मुख्यमंत्री के पास अपेक्षित प्रशासनिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि आज राजनीतिक विमर्श का बड़ा हिस्सा लोगों को धर्म और समुदाय के आधार पर बांटने पर केंद्रित दिखाई देता है तथा हिंदुओं को डर दिखा कर और मुसलमानों के प्रति नफरत पैदा करके राजनीति को आगे बढ़ाने का प्रयास। यह लोकतांत्रिक समाज और देश दोनों के लिए शुभ संकेत नहीं है। भारत की शक्ति उसकी विविधता, सह-अस्तित्व और सामाजिक सौहार्द मे रही है। दूसरी ओर धर्म के नाम पर भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमिताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों के दुरुपयोग की खबरें चिंता पैदा करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम पर जनता द्वारा समर्पित धन का लूट हो रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा से दंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार के विरोध मे खड़े सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों से सोनम वांगचुक को अकेला नहीं छोड़ने का अनुरोध किया है। उनके समर्थन में देश भर में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित करने, सांकेतिक उपवास, धरना, जनसभा और जन जागरण अभियान चलाने की भी सलाह दी है। इसके लिए पूरे देश के लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल लद्दाख का प्रश्न नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र संघीय व्यवस्था और नागरिक अधिकारों का प्रश्न है। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब जनता की शांतिपूर्ण आवाज को सम्मानपूर्वक सुना जायेगा।
