
RKTV NEWS/गिरिडीह(झारखंड)16 जुलाई।उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रामनिवास यादव ने आज पीरटांड़ प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर विभिन्न विकास योजनाओं की जमीनी स्थिति का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पैदल चलकर योजनास्थलों का अवलोकन किया, निर्माण कार्यों की संभावनाओं एवं स्थानीय आवश्यकताओं का जायजा लिया तथा ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं, सुझावों एवं अपेक्षाओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान उपायुक्त ग्रामीणों के बीच खाट पर बैठकर काफी देर तक चर्चा करते रहे और अधिकारियों को ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित एवं व्यवहारिक समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाओं की स्वीकृति देना नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय पर धरातल पर उतारना और उसका लाभ प्रत्येक ग्रामीण तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सड़क जैसी आधारभूत संरचना ग्रामीण विकास की रीढ़ है तथा बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार एवं अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होती है।
इसी क्रम में उपायुक्त ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा सुदृढ़ करने एवं आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पीरटांड़ प्रखंड की दो महत्वपूर्ण पी.सी.सी. सड़क निर्माण योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें प्रथम योजना के तहत पीरटांड़ प्रखंड के पंचायत मधुबन (उत्तरी पारसनाथ) अंतर्गत पीपराडीह से दलवाडीह तक पी.सी.सी. पथ निर्माण के लिए ₹88,62,400 की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। वहीं दूसरी योजना के तहत पीरटांड़ प्रखंड के पंचायत उत्तरी पारसनाथ अंतर्गत कोठाटांड़ से वाइल्ड लाइफ सीमा प्रारंभ बिंदु तक एवं वाइल्ड लाइफ सीमा के अंतिम छोर से नदी तक पी.सी.सी. पथ निर्माण के लिए ₹39,57,400 की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इन दोनों योजनाओं पर कुल ₹1,28,19,800 की लागत से कार्य कराया जाएगा। इन योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु कार्यकारी एजेंसी के रूप में कार्यपालक अभियंता, एन.आर.ई.पी., गिरिडीह को नामित किया गया है। उपायुक्त रामनिवास यादव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त योजनाओं की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण करते हुए शीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं निर्धारित मानकों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाए तथा कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग कर समय पर पूरा कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को बेहतर सड़क संपर्क एवं आवागमन की सुविधा का लाभ मिल सके। किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारियों एवं एजेंसी की जवाबदेही तय की जाएगी।
ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उपायुक्त ने उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना तथा भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन से पूर्व स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों से समन्वय स्थापित करते हुए स्थल से संबंधित सभी आवश्यक पहलुओं का सत्यापन सुनिश्चित करें, ताकि योजनाओं का लाभ अधिकाधिक लोगों तक पहुंचे। निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, गुणवत्ता परीक्षण एवं समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब उसका लाभ आम ग्रामीणों को प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त हो। इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी, डुमरी, प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचलाधिकारी, पीरटांड़, कार्यपालक अभियंता, एन.आर.ई.पी. सहित संबंधित विभागों के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
