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भोपाल:कृषि केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था की है धुरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान के साथ जोड़ा जय अनुसंधान।

भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)09 अप्रैल।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि केवल आजीविका नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही है। कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की धुरी है और प्रदेश के समग्र विकास का आधार भी है। उन्होंने कहा कि आज कृषि एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, मृदा की घटती उर्वरता और बाजार की अस्थिरता जैसी चुनौतियां हमें नई सोच और नवाचार की ओर प्रेरित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के कृषि क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाओं का विस्तार हुआ है, तकनीक को खेतों तक पहुंचाया गया है और नवाचार को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। “ड्रोन दीदी” जैसी पहल के माध्यम से महिलाएं भी आधुनिक कृषि तकनीक से जुड़ रही हैं, वहीं कृषि सखियों के माध्यम से जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “कृषिः मूलं जीवनम्” का भाव हमारे समाज की जीवन-दृष्टि को व्यक्त करता है। कृषि धन्य है, पवित्र है और जीवन का मूल आधार है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए “समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश” की थीम पर पूरे वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि उत्सव मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को भविष्य की कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना और कृषि को लाभकारी, स्थायी तथा तकनीक आधारित रोजगार सृजन मॉडल में परिवर्तित करना है।

एग्री स्टैक योजना में म.प्र. अग्रणी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के जीवन को आसान बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग कर रही है। एग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत किसानों का संपूर्ण डेटा डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है और इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी रहा है। डिजिटल किसान डेटा इंटीग्रेशन से किसानों की जमीन, फसल और उत्पादन से जुड़ी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो रही है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से किसानों को मौसम, बाजार भाव और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है।

कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भावना के अनुरूप जय जवान-जय किसान के साथ जय विज्ञान जोड़ा गया था और वर्तमान दौर में इसमें “जय अनुसंधान” को भी जोड़ने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती, कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन और बेहतर मार्केट लिंकेज के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में खेती में नवीन पद्धतियों और फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। रसायन मुक्त खेती, जैविक कृषि और प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि अवशेषों अर्थात पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन, मंडियों के आधुनिकीकरण और कृषि उत्पादों को ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफार्म से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भी पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कृषि को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे कृषक परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सके और शहरी परिवारों को ग्रामीण संस्कृति से परिचित होने का अवसर प्राप्त हो। साथ ही फूड प्रोसेसिंग और एग्री इंडस्ट्री को बढ़ावा देकर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और प्रदेश के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे के माध्यम से फसलों की निगरानी भी की जा रही है। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स का विस्तार, मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा, पर्यावरण संरक्षण के लिए नरवाई प्रबंधन तथा जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से किसानों के लिए लाभकारी कृषि का समग्र विकास सुनिश्चित करना है।
पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से सहायता सीधे किसानों के खातों में पहुंच रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसानों को फसलों का उचित मूल्य मिल रहा है और किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कम ब्याज पर ऋण की सुविधा मिल रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों की फसलों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के साथ कृषि को नई दिशा देने का संकल्प ही प्रदेश के किसानों को समृद्ध बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

किसानों के हित में किये जा रहे कार्य

पीएम किसान सम्मान एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 84 लाख से अधिक किसानों के खातों में प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये की सहायता ।

गेहूं उपार्जन पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस।

धान पर 4 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर प्रोत्साहन राशि।

मूंग-उड़द की एमएसपी पर खरीदी तथा उड़द पर 600 रुपये बोनस ।

आपदा प्रभावित 24 लाख से अधिक किसानों को 2106 करोड़ रुपये की राहत ।

पहली बार सोयाबीन का एमएसपी पर उपार्जन और भावांतर योजना में 1500 करोड़ रुपये का भुगतान।

सरसों को भी भावांतर योजना में शामिल किया गया ।

किसानों को 0 प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण।

1.79 करोड़ से अधिक किसानों को फसल बीमा की सुरक्षा।

पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत 32 लाख किसानों को सोलर पंप।

सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना से सोलर बिजली से आय का अवसर।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति किसानों को 5 एचपी तक मुफ्त बिजली।

5 रुपये में स्थायी बिजली कनेक्शन।

हर साल 10 लाख नए कनेक्शन देकर 24 घंटे बिजली की व्यवस्था ।

कोदो और कुटकी का क्रमशः 2500 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल पर उपार्जन

1000 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस ।

कृषि से जुड़े उद्योग लगाने वालों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी।

इन इकाइयों में कार्य करने वालों को 5 हजार रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन।

तुअर दाल आयात पर मंडी टैक्स समाप्त ।

फूलों की खेती से नई आय

प्रदेश में 44 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती का विस्तार किया गया है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात भी बढ़ रहा है।

एक जिला–एक उत्पाद को प्रोत्साहन

प्रदेश के 7 जिलों के विशेष उत्पादों को बढ़ावा देने और उनके विपणन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

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