एक संदेश
रोको, रोको युद्ध,
यह महाविनाशकारी है युद्ध,
होगा भीषण संहार,
दुर्लभ होगा मुख का आहार,
छायेगी भीषण महामारी,
जग पर छायेगी आतप भारी,
तेरा उन्माद भले रह जाय,
सोचो तो जो होगा संहार।
क्यों अशांत करते हो,
क्यों उद्वेलित करते हो,
क्यों मनमानी करते हो,
क्यों अभिमानी बनते हो ।
क्या शांति का राह है ठीक नहीं,
क्या धीरज का राह है अवरूद्ध अभी, क्या इन्सानियत की कोई पूछ नहीं क्या विश्व मंच का उपहास नहीं ।
पीड़ित मानवता के अश्रुधारा को मत बहने दो,
नाहक ना कोई रोये, सब को शांति से रहने दो ।
एक-एक बूँद अंगारें होंगे,
तेरे विनाश के कारण होंगे,
रूक जायेगी युद्ध अभी,
फिर कभी नहीं अकारण होंगे।
कोई विधवा तो रोयेगी,
कोई रोयेगा बृद्ध बाप;
छाती माता-बहना की फाटेगी,
बच्चे विलखेंगे, हाय बाप ।
इन पापों को क्या ढोवोगे,
इन संतापों को क्या झेलोगे;
तो छोड़ो अपनी शेखी,
अपना जोम, सब जय बोलेंगे ।
सीखो बस जीओ और जीने दो;
ये महामंत्र है शांति का,
इसको फलने दो ।


