
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)08 मई।बिहार के नया भोजपुर में स्थित नवरत्न किला जिसे नवरत्नगढ़ किला भी कहा जाता था।प्राप्त जानकारी के अनुसार परमार वंशीय राजा रुद्र प्रताप सिंह ने 1633 ई. में इसका निर्माण कराया था। सामाजिक धार्मिक कार्यकर्ता कुमार मोहित ने इस ऐतिहासिक किला को जाकर देखा और तथ्यों की जानकारी की। इन्होंने बताया की
खंडहर हो चुके इस किले की वास्तुकला की छाप अभी भी धुंधली सी दिखाई देती है ।यह किला कभी अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध था, जिसमें 52 गलियां और 56 बाजार थे। वर्तमान में यह किला उपेक्षा के कारण जर्जर अवस्था में है और मलबे और खंडहर में तब्दील हो रहा है।क़िले के आसपास शौच का स्थान भी बन चुका है जो गंध के साथ आसपास के स्थान को दूषित भी कर रहा है ।यह स्थल राजा भोज के वंशजों के गौरवशाली इतिहास को दर्शाता है ।मुगलों ने इसके निर्माण के कुछ वर्षों बाद इस पर आक्रमण किया था जिससे इस किले को क्षति भी पहुँची थी । क़िले को देखने के बाद दुख होता है की कैसे सरकार – प्रशासन वास्तुकला के इस ऐतिहासिक धरोहर को दरकिनार कर दिया, उपेक्षित कर दिया।इस क़िले के संरक्षण के लिये कई कमिटियाँ बनी परन्तु हर बार फ़ाइलो में ही दब के रह गई ।राजा भोज का अहसास कराने वाले इस ऐतिहासिक धरोहर को जमींदोज होने से बचाने के लिये मैं सरकार और प्रशासन से आग्रह करता हूँ इस प्राचीनतम धरोहर को बचाने के लिए उचित कदम उठाये
