RK TV News
खबरें
Breaking Newsआलेख

डेटा उपनिवेशवाद के खतरों से को समझें

आरा/भोजपुर (अतुल प्रकाश,अधिवक्ता सह संपादक , जनहित परिवार पत्रिका)04 मई।

डेटा उपनिवेशवाद क्या है?

साधारण भाषा में 18वीं-19वीं सदी में यूरोपीय ताकतों ने एशिया-अफ्रीका के जमीन-खनिज, मसालों जैसे उत्पादों पर कब्जा किया, वैसे ही 21वीं सदी में बड़ी टेक कम्पनियाँ दुनिया के लोगों का डेटा निकालकर उस पर मुनाफा और ताकत बना रही हैं। इसे ही डेटा उपनिवेशवाद कहते हैं।

डेटा उपनिवेशवाद कैसे कार्य करता है?

1. *कब्जा*- आप अपने मोबाईल पर फ्री में जी मेल, मैप्स, रील्स आदि अप्लीकेशन चलाते हैं। बदले में कंपनी आपकी हर क्लीक, लोकेशन, रूकने का समय रिकॉर्ड करती है और इस तरह से आपके व्यवहार का मूल्यांकन कर आपको उपभोक्ता से कच्चा-माल/ रॉ-मेटेरियल में बदल देती है।

2. *प्रोसेसिंग*- आपका डाटा अमेरिका/यूरोप के सर्वर में जाता है। जहाँ AI एल्गोरिदम इसे साफ करके आपकी ‘डिजिटल प्रोफाईल’ बनाता है- आप क्या खरीदेंगे, किसे वोट देंगे, कब डिप्रेस्ड होते हैं आदि बहुत सारे व्यवहार की जानकारी इकट्ठा की जाती है।

3. *मुनाफा* – किस तरह से डेटा से मुनाफा कमाया जाता है इसको उदाहरण से समझते हैं जैसे-डाटा इकट्ठा करने वाली टेक कम्पनी भारत के किसी लोकल जूते के दुकानदार को कहती है कि 1000/- (एक हजार रुपए) दो मैं तुम्हारा विज्ञापन उस आदमी को दिखाऊँगा जो अभी ‘जूते’ सर्च कर रहा है। भारत का विज्ञापन और धन विदेश चला गया।

4. *निर्भरता*- धीरे-धीरे आपके स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, खेती, कोर्ट आदि सहित सारे सेवा क्षेत्र कम्पनी के क्लाउड, AI पर चलने लगते हैं। अगर कम्पनी दाम बढ़ाए या सेवा बंद करे तो आप मजबूर हो जाएँगें ठीक उसी तरह से जैसे भारत की आजादी के पूर्व नील की खेती के लिए भारतीय किसान थे वहीं बंगाल के बुनकर अपने अँगूठे काटने पर मजबूर हुए थे।

डेटा उपनिवेशवाद के तीन बड़े खतरे

1. *आर्थिक*- भारत में 90 करोड़ इंटरनेट यूजर हैं। 2023 में डिजिटल विज्ञापन का बाजार 100000/- (एक लाख करोड़ रूपए) का था। जिसमें 2026 में डेढ़ गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और जिसका 75% मुनाफा मेटा और गूगल नामक कम्पनी को गया। इस तरह से डेटा हमारा और मुनाफा उनका।

2. *सामरिक*- अगर सारा डेटा विदेशी सर्वर पर हो तो, युद्ध/ प्रतिबंध की स्थिति में देश ठप्प हो सकता है।

3. *सामाजिक*- ‘फूट डालो और शासन करो’ का डिजिटल संस्करण प्रारंभ हो चुका है। फेसबुक डेटा से वोटर का मन बदला गया। AI आपके बिहेवियर का मूल्यांकन करके वही दिखता है जो आप देखना चाहते हैं। AI आपके स्वभाव को कट्टर बनाने पर तुला है।

*निष्कर्ष*- निष्कर्षतः हम कह सकते हैं कि डेटा उपनिवेसवाद का मतलब है कि बिना सेना भेजे सिर्फ एप और ‘I AGREE’ बटन से किसी देश के लोगो की आदत पसंद और फैसले को कंट्रोल करना। पुराने जमाने में सोना लूटा जाता है आज ध्यान (Attention) लूटा जाता है और ध्यान (Attention) ही नया पैसा है।

Related posts

भोजपुर: आगामी लोकसभा आम निर्वाचन 2024 को ले जिलापदाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी की मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठक।

rktvnews

1.60 करोड़ रुपए की लागत से नवनिर्मित नगरपालिका भवन का किया लोकार्पण।

rktvnews

जनहित में उपयोगी कार्य को लेकर उपायुक्त अबु इमरान हुए सख्त!उपायुक्त के निर्देश पर कार्यकारिणी एजेंसी एनआरईपी ने कार्य में रुचि नहीं लेने वाले संवेदकों को तलब कर, दिया अंतिम चेतावनी,तीन दिनों के अन्दर अग्रधन की राशि जमा करें।

rktvnews

भोजपुर: जवईनिया कटाव पीड़ितों के राहत एवं पुनर्वास की मांग को लेकर सासंद सुदामा प्रसाद के नेतृत्व में माले के प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से की भेंट, सौंपा मांग पत्र।

rktvnews

बिहार: पटना:छठव्रतियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को किया अर्घ्य अर्पण! रक्तिम रवि को किया नमन।

rktvnews

प्रधानमंत्री ने भारत रत्न नानाजी देशमुख को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

rktvnews

Leave a Comment