डाक डीवन बीमा
हर वज्रघात को कुंठित कर के रख दूँगा, निज प्रतिछाया पर गोवर्धन-सा, छतरी को मैं रख दूँगा।
मुन्ने के शैशव ही में, वैभव का पटना ला दूंगा; आँधी में ही दीप शिखा ये भले बुझे, पलने में हीरा जड़ दूँगा।
और लाड़ली के हाथों को किसी श्याम सरीखे तक कर दूंगा; तथा तेरे कंधों का बोझ प्रिये धीरे से हल्का कर दूँगा।
आफत में हर पल में सहयोग डाक का ये देता हूँ। डाक जीवन बीमा का शहद बुन्द बस ये देता हूँ।
सुख सपना जीवित क्षणों में, साकार कभी तो हो जायेगा; अगर मियादी का धारक बन, बीम जीवन का हो जायेगा।
आजीवन धारक बीमें का यदि बना तो, स्वर्ग से झलक कभी पा जाऊँगा; और सलोनी सूरत पर प्रिये, जब मुस्कान तुम्हारा पा जाऊँगा
देख हथेली पर कैसे, ये हरी-भरी पत्तियाँ प्रफुलित हैं;
बीमे से पा रही सुरक्षा, कभी न कंपित बस विकसित हैं।
आओ कोई डाक पाल से जीवन का बीमा कर डालो; आसान किस्त, लाभांश पूरा ले, घर को अपना भर डालें।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की चवालिसवी रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)

