
इंदौर/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद) 26 अप्रैल। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधीश, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं संरक्षक-प्रमुख के दूरदर्शी नेतृत्व में तथा न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, न्यायाधीश, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कुशल मार्गदर्शन में, जेल बंदियों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
26 अप्रैल 2026 को, मध्यप्रदेश राज्य में अपनी तरह की प्रथम पहल के रूप में, विशेष जेल लोक अदालत का उद्घाटन संपूर्ण राज्य के लिए केंद्रीय जेल, ग्वालियर से न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधीश, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा किया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति आनंद पाठक, प्रशासनिक न्यायाधीश, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ ग्वालियर एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, ग्वालियर, तथा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशगण उपस्थित रहे।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि कोई व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता; परिस्थितियाँ, चुनाव और कभी-कभी भाग्य उसे उस राह पर ले जाते हैं। फिर भी यह भी उतना ही सत्य है कि प्रत्येक व्यक्ति में परिवर्तन की अपार क्षमता होती है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि सबसे अंधेरे रास्तों पर चलने वाले लोग भी दृढ़ संकल्प और आत्मज्ञान से महान मानव बन सकते हैं। महर्षि वाल्मीकि इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।
उन्होंने आगे दोहराया कि जीवन प्रत्येक व्यक्ति को सुधार और नई दिशा चुनने का अवसर देता है। उन्होंने बंदियों को इस अवसर का उपयोग आत्म-चिंतन के लिए, भूतकाल की गलतियों से सीखने के लिए और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उनसे नए कौशल अर्जित करने और अपनी अंतर्निहित प्रतिभाओं को संवारने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लोक अदालत केवल विवाद निपटान का मंच नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत की दिशा में एक सार्थक कदम है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बंदी समाज में जिम्मेदार और सुधरे हुए व्यक्तियों के रूप में सकारात्मक योगदान करते हुए पुनः प्रवेश करें।
न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल ने जेल परिसर के भीतर विशेष लोक अदालत आयोजित करके बंदियों को एक मूल्यवान अवसर प्रदान किया है, जिससे सुलभ न्याय सभी तक पहुँच सके। उन्होंने आगे बल दिया कि लोक अदालतों का प्राथमिक उद्देश्य केवल अपराधों या विवादों का निपटारा करना नहीं है, बल्कि ऐसे विवादों के मूल कारणों की पहचान करना और उन्हें जड़ से सुलझाने का प्रयास करना है। उन्होंने यह भी कहा कि हम सभी को वर्ष 2047 तक एक विवाद-मुक्त समाज की स्थापना का प्रयास करना चाहिए और इस लक्ष्य में हमारा व्यक्तिगत योगदान राष्ट्र की एक महान सेवा होगी। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया,न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के, न्यायमूर्ति आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति अमित सेठ, न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत एवं न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त धर्मिंदर सिंह, महारजिस्ट्रार, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय; जी. अखेतो सेमा, विशेष महानिदेशक, कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएँ, मध्यप्रदेश, ललित किशोर, प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ग्वालियर, जाकिर हुसैन, प्रमुख जिला न्यायाधीश (निरीक्षण), सुमन श्रीवास्तव, सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, राजीव के. पाल, प्रमुख रजिस्ट्रार, नवीन कुमार शर्मा, रजिस्ट्रार, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ ग्वालियर; अरविंद श्रीवास्तव, अपर सचिव, म.प्र.रा.वि.से.प्रा.; रुचिका चौहान, कलेक्टर, ग्वालियर; धर्मवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक, ग्वालियर; विदित सिरवैया, जेल अधीक्षक, केंद्रीय जेल, ग्वालियर; तथा अन्य न्यायिक अधिकारी एवं जेल प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य भर के प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अन्य जिलों के न्यायिक अधिकारी, जेल लोक अदालत के पीठासीन अधिकारी एवं सदस्य, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिव, जिला विधिक सहायता अधिकारी एवं जेल अधीक्षक आभासी माध्यम (वर्चुअल) से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम का संचालन सुमन श्रीवास्तव, सदस्य सचिव, म.प्र.रा.वि.से.प्रा. द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन जी. अखेतो सेमा, विशेष महानिदेशक, कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएँ, मध्यप्रदेश द्वारा दिया गया।
प्रशासनिक दक्षता एवं न्याय के प्रति प्रतिबद्धता के एक सराहनीय प्रदर्शन में, जिला इंदौर ने इस विशेष जेल लोक अदालत में विभिन्न श्रेणियों में कुल 57 प्रकरणों का निपटारा कर राज्य में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। उल्लेखनीय है कि पुलिस कमिश्नरेट, इंदौर ने मुख्य न्यायाधीश के प्रेरणादायी उद्गारों को आत्मसात करते हुए एक अधिक उदार एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाया तथा निवारक उपायों के अंतर्गत गिरफ्तार एवं बंदी बनाए गए व्यक्तियों द्वारा की गई क्षमा-याचना पर अनुकूल विचार करते हुए उनकी समयबद्ध रिहाई एवं समाज में पुनर्एकीकरण को सुगम बनाया। विभिन्न श्रेणियों के प्रकरण, जिनमें दोष स्वीकृति (प्ली बार्गेनिंग) के प्रकरण, आपराधिक शमनीय प्रकरण, लघु अपराध प्रकरण, संक्षिप्त प्रकरण, दीवानी एवं वैवाहिक मामले तथा संबंधित सांविधिक प्रावधानों के अंतर्गत प्रकरण सम्मिलित थे, लिए गए, जिससे बड़ी संख्या में प्रकरणों का निपटारा हुआ और अनेक बंदियों की रिहाई सुनिश्चित हुई।
ये प्रकरण जेल लोक अदालतों के महत्व को रेखांकित करते हैं, जो समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने, लंबितता को कम करने और सुलह को बढ़ावा देने में सहायक हैं, तथा वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र में आस्था को और सुदृढ़ करते हैं। इस अभिनव पहल ने न्याय प्रदायगी प्रणाली को सीधे जेल परिसर तक पहुँचाया, जिससे बंदी बिना न्यायालय गए अपने प्रकरणों का समाधान कर सके — यह प्रयास बंदियों में राहत एवं सराहना की भावना के साथ स्वीकार किया गया।
