
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)16 अप्रैल।इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय आज वर्ल्ड आर्ट डे पर “मेरे शहर का रंग” शीर्षक से एक आकर्षक चित्रकला प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन संग्रहालय की अंतरंग भवन वीथि संकुल स्थित पीरियॉडिकल गैलरी में किया गया।
यह प्रदर्शनी शहर की विविध सांस्कृतिक, सामाजिक और भावनात्मक छवियों को रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त करती है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. विद्या राकेश, निदेशक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन भोपाल (NID भोपाल) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में जूरी में शामिल ख्यातिनाम वरिष्ठ चित्रकार श्री अखिलेश वर्मा, वीणा जैन, डॉ. संजू जैन, बसंत भार्गव सहित मानव के प्रशासनिक अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार उपस्थित रहे।
प्रदर्शनी का उद्घाटन दीप प्रज्वलन कर सभी अतिथियों ने किया।
मुख्य अतिथि ने कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “कला समाज का दर्पण होती है और इस प्रकार की प्रदर्शनियां भोपाल शहर की आत्मा को समझने का माध्यम बनती हैं।”
विश्व कला दिवस के अवसर पर दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित “मेरे शहर का रंग” पेंटिंग प्रतियोगिता में शहरभर से बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया।
जिनमें कलाकारों ने अपने शहर भोपाल की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक सौंदर्य को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया।
जिनमें से चुनी गई 30 पेंटिंग को संग्रहालय की इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है ।
इस प्रतियोगिता में आयुष कुशवाह (20 वर्ष) की गोंड पेंटिंग को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। उनकी कलाकृति में पारंपरिक गोंड कला शैली के माध्यम से शहर की जीवंतता और लोक संस्कृति का आकर्षक चित्रण किया गया।
द्वितीय पुरस्कार अंशुल सोलंकी (24 वर्ष) को उनकी “राजा भोज” विषय पर आधारित पेंटिंग के लिए दिया गया, जिसमें ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक दृष्टिकोण से दर्शाया गया।
तृतीय पुरस्कार मंजू सिंह (45 वर्ष) को उनकी “ताजुल मस्जिद” पर आधारित कलाकृति के लिए प्रदान किया गया, जिसमें भोपाल की प्रसिद्ध स्थापत्य कला को बारीकी से उकेरा गया।
इस अवसर पर मानव संग्रहालय के अधिकारीगण, कलाकार, छात्र-छात्राएं तथा विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों के सदस्य भी उपस्थित रहे।
प्रदर्शनी में भाग लेने वाले कलाकारों ने अपने चित्रों के माध्यम से शहर की परंपरा, आधुनिकता, दैनिक जीवन, लोक संस्कृति एवं स्मृतियों को रंगों में जीवंत किया है। प्रत्येक कृति में स्थानीयता की झलक के साथ-साथ व्यक्तिगत अनुभवों की गहराई भी दिखाई देती है।
मानव संग्रहालय के निदेशक डॉ अमिताभ पांडे ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना और आम जनमानस को कला से जोड़ना है।
संग्रहालय के वीथि संकुल प्रभारी डा मोहन लाल ने बताया कि यह प्रदर्शनी निर्धारित अवधि 15 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।
