
वृद्धा वर्णनम् !
शिथीलम् शरीरम्, न शक्ति पद चापम्, दन्तम् विहीनम्, चक्षु ददति नित माखनम् । न अवलोकितम् पथम्, धारयितम् दण्डम्, किंचीत जनाः मस्तकम्, दृश्यति अस शिलाखंडम ।
श्यामलम् केशम् तत भवेत श्वेतम्, उत्तल उदरम् च भवेत रेतम् । न किंचीत भविष्यम्, सर्वम् अतीतम्, निद्रा अभावे जाग्रते रात्री व्यतीतम् ।
पुत्र पुत्रवधु हस्ते हस्तान्तरिम कुंजीकम्, द्वारे अग्र भागम् तत भवति शयनकक्षम् । स्मरण लोपमए, परिवार कोपम् नित भोजनम्, बुद्धम् बदति, वृद्धा स्वयं दुःख कारणाम् ।
दीर्घ श्वासम्, परन्तु न किंचीत उद्रेकम्, तत सन्तति वृद्धि किम् आयोजनम् । शान्तम् शान्तम् भज गोविन्दम् । कल्याण कार्ये, अथ समयम् व्यतीतम् सा सुखम्

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की तेंतीसवी रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)
