
भावी पीढ़ी !
शिव बनो, गरल पीयो, दुनियो को न जलने दो; अब तो छात्र बनो, बोतल पीयो, विद्यालय को न चलने दो।
तांडव वो किये थे, कैबरे, डिस्को तुम क्यों करो; माथे पर हाथ वो न रखवाये, क्यों रखो तुम, कि दूसरों पर मरो।
भस्म वो लगाते थे, धतुरा भाँग पीते थे; तो क्या पाउडर ही लगाओगे, कि आनेवाली पीढ़ी ये न समझे तुम पीछे थे।
शिव के संहार में, जगत का कल्याण होता है; बिना समझे आज बढ़ते हैं, और जग रोता है।
हद है पढ़ाई गयी, पैरवी आयी, अक्ल गयी, नकल आयी; देश डूबा, बाँध टूटा, पेट में औजार छूटा,
आत्म दर्शन छोड़कर, अब दूरदर्शन कर रहे है, अस्मत जो बची थी अबतक वह सरे बाजार लूटा।
मोहलत को सोहरत समझा, झूठे साक्ष्य को न्याय समझा; कैसे-कैसे को डाक्टर, इंजीनियर, वकील और पंच समझा, गीता, कुरान, बाइविल, ग्रन्थ को, छूकर कुछ भी कहना धर्म समझा।
वैसा न करो कि बैठे जिस डाल पर, वह भी कट जाय, फिर तुम ढूढ़ते रहो, और कुछ भी न मिल पाय ।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की बीसवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)
