
आरा/ भोजपुर (वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र सिंह)31 मार्च। जमीरा हॉल्ट के बांध के समीप जिला प्रशासन द्वारा बसाए गए कुष्ठ रोगियों की दुर्दशा चिंता का विषय बन कर रह गई है।कई नव समाजसेवी अपने अपने विधानसभा क्षेत्र में कई सामाजिक कार्य कर रहे हैं पर गांधी कुष्ठाश्रम,जमीरा जो सार्थक मानव कुष्ठाश्रम,जयपुर(राजस्थान ) के सहयोग से चल रहा है जो आज भी हमारे समाज,नेता,समाजसेवी और जिला प्रशासन की निगाह में अछूत बना हुआ है तभी तो आज तक इस बस्ती में जाने के लिए कोई सार्थक रास्ता नहीं बन पाया है और न ही विकास के कोई कार्य किए गए हैं।
इसका खुलासा तब हुआ जब के जी एन ट्रेड्स(दौलतपुर) के मालिक राम जी प्रसाद यादव द्वारा इनके बीच अन्न का वितरण किया गया।भाव विभोर होकर श्री यादव द्वारा बताया गया की मैं पहली बार यहां आया हूं चूंकि अन्नकूट के तहत गरीब बस्ती में अन्न का वितरण करना था तो मैने सोचा क्यों नहीं कुष्ठ रोगियों के बीच इसका वितरण किया जाए।
साथ में रहे पंकज कुमार ने बताया की इनलोगों की (बस्ती) जिंदगी मुसहर टोली से भी बदतर है।नव समाजसेवी और शासन प्रशासन को इस बस्ती पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि ये भी इंसान है ।
छोटे छोटे लगभग दो सौ झोपड़पट्टियों के रहकर अपना जीवन जीने वाले कुष्ठ रोगी बताते हैं की हमलोग नर्क की जिंदगी जीते हैं ।लंबे खेत के रास्ते पर हमलोगों को बसाया गया है। हमलोगों के पास आने के लिए बस एक ही रास्ता है जो जमीरा हॉल्ट के समीप बने पूल के नीचे से आता है जहां सालों भर जल जमाव रहता है फिर बांध जो समतल नहीं है पर चढ़कर आना पड़ता है।
कुष्ठ रोगियों के मेठ के रूप में रहे साह जी जिन्हें मुखिया भी कहा जाता है ने अपने समाज की पीड़ा और दुख को मौन रहकर सिर्फ इतना कह पाते हैं की आपलोग सब देख ही रहे है,हां यहां एक स्कूल हमारे लिए बना है।बाकी हमलोग कुछ नहीं कहेंगे बस लोगों से अपील करेंगे की हमलोगों को भी सहयोग चाहिए।
साथ में रहे प्राकृतिक चिकित्सक नन्द किशोर राम बताते है की किस तरह हमारी गाड़ी लंबे जल जमाव के पानी को पार कर बांध पर पहुंची है और बांध के रास्ते को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है। इनलोगो को शासन प्रशासन से सहयोग की नितांत आवश्यकता है।
एक महिला ने बताया कि हमलोग सालों भर टूटे फूटे चौकी पर ही ज्यादा रहते और सोते हैं क्योंकि सांप बिच्छू और अन्य जहरीले जानवरों से प्रतिदिन सामना होता है।महिला ने बताया कि जिन झोपड़ियों में चौकी नहीं है वो लोग बांस का मचान बनाकर रात में सोते हैं।अब पता नहीं हमलोगों का दर्द शासन प्रशासन और नेता जी कब समझेंगे।


