
पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 23 मार्च। बिहार प्रदेश चित्रगुप्त वंशज के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मण कुमार श्रीवास्तव ने बिहार दिवस के अवसर पर बिहार के सभी नागरिकों को शुभकामनायें देते हुए कहा कि बिहार की पावन धरती ने प्राचीन काल से ही ज्ञान, नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को बढ़ाया है। इस भूमि ने आचार्य चाणक्य जैसे महान कूटनीतिज्ञ का प्रभाव देखा है। बिहारवासियों ने देश और दुनिया भर मे अपनी ईमानदारी, मेहनत और प्रतिभा से पहचान बनाई है। बिहार के लोग जहाँ भी जाते हैं, अपने साथ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को साथ लेकर जाते हैं। नालंदा विश्व विद्यालय बिहार की ऐतिहासिक धरोहर है जिसे एक नई पहचान मिली है। चित्रांश डा सच्चिदानंद सिन्हा ने भाषाई आधार पर बिहार को अलग राज्य बनाने की लड़ाई लड़ी और उसके परिणामस्वरूप 22 मार्च 1912 को बिहार एक स्वतंत्र राज्य बना। विदित हो कि पहले उड़ीसा, बंगाल और बिहार एक ही राज्य के अंतर्गत आते थे। बिहार दिवस बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को प्रदशित करने का अवसर है। इस अवसर पर हमें बिहार विभूति डा सच्चिदानंद सिन्हा, देश के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डा.राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नरायण, महामाया प्रसाद जैसे विभूतियों को भी याद करना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मण श्रीवास्तव ने कहा कि मुझे बिहारी होने पर गर्व है। उन्होंने सभी बिहारियों से अपील की है कि गर्व से कहें हम बिहारी हैं।

