
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)08 मार्च।आज जनहित परिवार भोजपुर द्वारा जिला कार्यालय, शीतल टोला, आरा में जनहित परिवार की संरक्षक एवं पूर्व अध्यक्ष गायत्री सहाय के निधन पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय गणमान्य लोगों ने उपस्थित होकर दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि स्वर्गीय गायत्री सहाय जी एक समर्पित, कर्मठ और समाजसेवा के प्रति सदैव तत्पर रहने वाली व्यक्तित्व थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में जनहित परिवार को मजबूत बनाने तथा समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सेवा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनके निधन से जनहित परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। उनकी सादगी, सेवा भाव और मार्गदर्शन को सदैव याद किया जाएगा।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने संकल्प लिया कि वे उनके आदर्शों और बताए मार्ग पर चलते हुए समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाते रहेंगे।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिवार को इस दुःख की घड़ी में धैर्य और शक्ति प्रदान करें।
डॉ. ममता मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित शोकसभा में जनहित परिवार पत्रिका के संपादक अतुल प्रकाश ने शोक प्रस्ताव को प्रस्तुत किया और शोक प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए श्री प्रकाश ने गायत्री सहाय के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया की 27 अक्टूबर 1956 को मसौना, मनीली (रोहतास, बिहार) में जन्मी दिवंगत गायत्री सहाय वर्षाधीन समय संकेतमोचन नगर, आरा स्थित गायत्री सदन में रह रही थीं। दिवंगत गायत्री सहाय अपने पति साहित्यकार पति जगतनंदन सहाय की प्रेरणा से जनहित परिवार साहित्य मंडल से जुड़कर कई पुस्तकों की लेखिका थीं। उनकी कई रचनाएँ एवं कविताएँ स्थानीय, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में दिवंगत सहाय की रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। वे चर्चित साहित्यिक पत्रिका के सुजनलोक की पूर्व प्रबंध-संपादक थीं।
आकाशवाणी पटना के अलावा फ्रेसिका कैसेट कंपनी में उनके गीतों को प्रसारित किया है। उनके कई साक्षात्कार सोशल मिडिया में भी प्रसारित हैं। उनकी चर्चित प्रसिद्ध पुस्तकों में वर्ष 2007 में हिन्दी कविताओं का संग्रह *”मीत तुम्हें मैं जान पाई”* एवं भोजपुरी गीतों का संग्रह *”गायत्री के गीत”*, वर्ष 2008, हिन्दी गजलों का संग्रह *अंतरवेदना* एवं वर्ष 2017 में भोजपुरी कविता संग्रह *”संवेदना के स्वर”* आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा वर्ष 2018 में *”जगतनंदन सहाय एवं गायत्री सहाय की एक सौ दो कविताएँ”* के संयुक्त संस्करण में पचास कविताएँ प्रकाशित हुई हैं। वर्ष 2007 में दलित साहित्य अकादमी सम्मान, नई दिल्ली तथा वर्ष 2018 में जनहित साहित्य अकादमी सम्मान, आरा से सम्मानित हुई हैं।
सभा में ऑनलाइन तथा फिजिकल सैकड़ो सहित्यकारों ने भाग लिया। शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में नंदकिशोर सिंह कमल, अशोक श्रीवास्तव, डॉ किरण कुमारी, डॉ. रेणु मिश्रा , अगम पांडे ,आदित्य प्रकाश जयराम सिंह अनिल कुमार पांडे, अजय गुप्ता अज्ञानी, कुंवर सिंह शिव पुकार सिंह, शरद सिंह सुरेश भोजपुरी आदि प्रमुख थे।
