
RKTV NEWS/जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम)31 जनवरी।पंचम राज्य वित्त आयोग, झारखण्ड ने जेएसएलपीएस, मनरेगा तथा जिला परिषद पूर्वी सिंहभूम के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष अमरेंद्र प्रताप सिंह ने की। आयोग के द्वारा पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत जिला परिषद के माध्यम से ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों, जेएसएलपीएस के माध्यम से संचालित योजनाओ तथा मनरेगा अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया।
आयोग के अध्यक्ष अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने समाहरणालय सभागार में जेएसएलपीएस तथा मनरेगा की समीक्षा के क्रम में कहा महिलाओं की सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन में जेएसएलपीएस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, अधिक से अधिक महिलाओ को समूह से जोड़कर उनको आजीविका हेतु अधिक से अधिक गतिविधि संचालित करें। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से प्रत्येक महिला को जोड़े। महिला समूह को उनके रूचि के हिसाब से स्वरोजगार हेतु केसीसी सहित अन्य ऋण उपलब्ध कराने का प्रयास करें, कोई भी महिला समाजिक सुरक्षा योजना से वंचित न हो, इससे सुनिश्चित करें। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने, समग्र कृषि, बाजार अधारित खेती, प्रशिक्षण एवं बाजार की व्यवस्था बढ़ाने की आवश्यकता बताई। यहां किसान आम की खेती के साथ-साथ इंटर क्रॉपिंग भी करें। यहां उन्नत किस्म के आम, अनार, शरीफा, अमरूद, चीकू की भी बागवानी बेहतर विकल्प है। इसके अतिरिक्त बागवानी, पशुपालन, पारंपरिक कला, मशरूम, कुकूट पालन आदि योजनाओं से जोड़ते हुए उत्पादो का ब्रांडिंग, पैकेजिंग व बेहतर बाजार की व्यवस्था कराने का निदेश दिया गया। इससे महिलाओ एवं ग्रामीण अर्थ व्यवस्था मजबूत होगी, साथ ही लोगों का आर्थिक स्तर भी उपर उठेगा।
झारखंड के 5वें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री सिंह ने जिला परिषद पूर्वी सिंहभूम सभागार में जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित निर्वाचित प्रतिनिधियों व उपायुक्त, उप विकास आयुक्त के साथ समीक्षा बैठक कर संचालित योजनाओं की समीक्षा की। उन्होने कहा आयोग पंचायतों को संसाधन और शक्तियाँ हस्तांतरित करने, पंचायत उन्नति सूचकांक में सुधार, और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। झारखंड पंचम राज्य वित्त आयोग का उद्देश्य त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, ब्लॉक, जिला) को सशक्त बनाना और स्व-राज को प्रभावी करना है तथा ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने सभी विभागों को पंचायत को प्रदत्त अधिकारों की जानकारी रखने तथा नागरिकों को भी उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं में पंचायत की भूमिका अवश्य हो, तभी पंचायत सुदृढ़ हो सकेगा। पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण के लिए चयनित जन प्रतिनिधियो की सकारात्मक भूमिका आवश्यक है। उन्होने कहा पंचायतों में नियमित रूप से विभिन्न समितियों की बैठक हो और उसकी मॉनिटरिंग करें।
बैठक में जिला परिषद के आय के स्रोत में वृद्धि के लिए विमर्श करते हुए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग व रखरखाव करने, दूकानों का रेंट फिक्सेशन करने, क्यूआर कोड के माध्यम से ऑनलाईन रेंट वसूली करने का निदेश दिया गया। विभागीय निदेश के आलोक में बाजार हाट, सैरात आदि का बंदोबस्ती करने तथा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन हेतु जिप सदस्यों को प्रशिक्षण देने के लिए प्रस्ताव दिया गया। जिला परिषद के सदस्यो ने मानदेय में वुद्धि, विकास हेतु पिछले दो साल से रूका फंड रिलिज करने, अनुशंसित व प्रस्तावित योजनाओं की स्वीकृति राज्य वित्त आयोग से दिलाने तथा डीएमएफटी फंड के तहत जिला परिषद सदस्यों की भी योजनाएं अनुशंसा करने में भागीदारी दिलाने की मांग रखी। इसके अलावे नये आंतरिक संसाधन बनाने के लिए परिषद को अधिकार दिलाने की बात रखी।
बैठक में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, अध्यक्ष जिला परिषद बारी मुर्मू, उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान, उपाध्यक्ष जिला परिषद पंकज सहित जिला परिषद के सदस्य एवं संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे। समाहरणालय सभागार में प्रमुख रूप से जेएसएलपीएस तथा ग्रामीण विकास विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद थे।
