भारतीय एआई मॉडल वैश्विक समस्याओं के लिए ज्यादा प्रासंगिक हैं; हम पांचवीं औद्योगिक क्रांति के युग में कम लागत पर अधिकतम लाभ प्रदान कर रहे हैं: अश्विनी वैष्णव

एआई भारत में तकनीक को आम लोगों तक पहुँचा रहा है, इससे कुशल सेवाएँ देने में मदद मिल रही है: अश्विनी वैष्णव
RKTV NEWS/नई दिल्ली 21 जनवरी।केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने अश्विनी वैष्णव ने “एआई पावर प्ले” शीर्षक एक उच्चस्तरीय वैश्विक पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। इस चर्चा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी उभरती भू-राजनीतिक परिस्थितियों, इसके आर्थिक प्रभावों, शासन से संबंधित चुनौतियों और इसके समावेशी प्रसार के उपायों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस चर्चा में प्रमुख वैश्विक नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों और बहुपक्षीय संस्थाओं ने हिस्सा लिया जहां एआई के माध्यम से विभिन्न देशों में शक्ति संतुलन, उत्पादकता वृद्धि और नीतिगत ढांचे के बदलावों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
पैनल का संचालन यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष इयान ब्रेमर ने किया। इसमें अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक सुश्री क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ, सऊदी अरब के निवेश मंत्री खालिद अल-फलीह और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया।
अश्विनी वैष्णव ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि भारत स्पष्ट रूप से एआई को अपनाने और विकसित करने वाले देशों के अग्रणी समूह में शामिल है जिसने एआई आर्किटेक्चर के सभी पांच स्तरों यानी अनुप्रयोगों, मॉडल, चिप्स, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा में व्यवस्थित प्रगति की है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की एआई रणनीति का मुख्य उद्देश्य बड़े मॉडलों पर अत्यधिक केंद्रित होने के बजाय इसे वास्तविक दुनिया में लागू करना और निवेश पर लाभ (आरओआई) सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि निवेश पर लाभ सबसे बड़े मॉडल बनाने से नहीं मिलता। वास्तविक दुनिया में उपयोग होने वाले लगभग 95 प्रतिशत मामलों को 20-50 अरब पैरामीटर रेंज वाले मॉडलों का उपयोग करके हल किया जा सकता है। उन्होंने यह बताया कि भारत ने पहले ही कुशल और सस्ती प्रौद्योगिकी मॉडल विकसित कर लिए हैं, जिन्हें उत्पादकता, दक्षता और प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग को बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के साथ लागू किए जा रहे हैं। कम लागत पर अधिकतम लाभ प्रदान करने पर केंद्रित इस दृष्टिकोण से आर्थिक रूप से टिकाऊ एआई लागू करने की भारत की नीति स्पष्ट होती है। वैश्विक मानकों का उल्लेख करते हुए, श्री वैष्णव ने आईएमएफ की रैंकिंग पर सवाल खड़े किये और कहा कि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत एआई पैठ और तैयारी में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर और एआई प्रतिभा में दूसरे स्थान पर है।
श्री वैष्णव ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यापक प्रसार और उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने पर बल देते हुए, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से जीपीयू की उपलब्धता की गंभीर बाधा को दूर करने के लिए सरकार के निर्णय का विस्तार से उल्लेख किया। इस पहल के तहत, 38,000 जीपीयू को एक साझा राष्ट्रीय कंप्यूटिंग सुविधा के रूप में सूचीबद्ध किया गया है जिसे सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाती है और छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को वैश्विक लागत के लगभग एक तिहाई पर उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने भारत के राष्ट्रव्यापी एआई कौशल कार्यक्रम पर भी प्रकाश डाला जिसका उद्देश्य एक करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करना है ताकि भारत का आईटी उद्योग और स्टार्टअप घरेलू और वैश्विक सेवा वितरण के लिए एआई का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
चर्चा के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी वैश्विक एआई परिदृश्य में भारत की बढ़ती अहमियत को सराहा। इयान ब्रेमर ने उल्लेख किया कि भारत पिछले एक दशक में एक प्रमुख भू-राजनीतिक और तकनीकी शक्ति के रूप में उभरा है। इसके साथ ही, वैश्विक संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मिसाल के रूप में भारत के प्रसार, पहुंच और संप्रभु क्षमता पर दिए गए महत्व को रेखांकित किया।

