
बक्सर/बिहार (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)20 जनवरी।उत्तर वाहिनी भागीरथी गंगा बक्सर के प्रसिद्ध सिद्ध नाथ घाट पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भगवान के अवतार का हेतु बतलाते हुए आचार्य जी ने कहा कि भगवान के अवतार के अनेक हेतु है,पर मुख्य हेतु भक्तों पर कृपा बरसाना है।मानवमात्र का परमकल्याण का साधन श्रीमद्भागवत कथा है। श्रीमद्भागवत जी साक्षात नारायण कावांग्मयी स्वरूप हैं। श्रीमद्भागवत में 12स्कंध,18000, श्लोक और 335अध्याय हैं। श्रीमद्भागवत का प्रथम व द्वितीय स्कंध भगवान के चरण हैं, तृतीय और चतुर्थ स्कंध भगवान के जंघा हैं,पंचम स्कंध नाभी, षष्ठ स्कंध वक्षस्थल, सप्तम् और अष्टम स्कंध दोनों भुजाएं ,नवम् स्कंध कंठ,दशम् स्कंध मुख,एकादश स्कंध ललाट और द्वादश स्कंध मस्तक है। जिस घर में श्रीमद्भागवत जी रहते हैं ,उनपर तुलसी दल अर्पण होता है ,उस घर में लक्ष्मी का सदा वास होता है।
आचार्य जी ने परीक्षित चरित्र कहते हुए कहा कि अनीति की कमाई से किसी का कल्याण नहीं हुआ है, क्षणिक सुख मिलता दिखाई पड़ता है,पर अन्त दुःखदाई ही होता है। आचार्य जी ने विदुर मैत्रेय संवाद के माध्यम से माया के स्वरूप को बतलाते हुए कहा यद्यपि जो है नहीं,पर है जैसा दृष्टिगत होता है, वहीं माया है। माया साधक भी है और बाधक भी। आचार्य जी ने श्रृष्टि रचना पर प्रकाश डालते हुए मनु शतरूपा से उत्पन्न संतानों यथा दो पुत्र प्रियब्रत, उत्तानपाद,और तीन पुत्रियों देवहूति,आहुति और प्रसुति की संक्षिप्त कथा सनाते हुए ध्रुव चरित्र के रहस्य का उद्घाटन करते भक्ति की महिमा और भगवान के सरल स्वभाव का बखान किया। पं शिवजी पांडेय के संयोजकत्व में संचालित समिति के सभी सदस्यों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। बक्सर के अतिरिक्त बलिया के भक्त भी बड़ी संख्या में कथा श्रवण करने आ रहे हैं। प्रसाद भंडारा की समुचित प्रबंध किया गया है।
