परिवार में हुई प्रत्येक जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीकरण कराना अत्यावश्यक: उप विकास आयुक्त
RKTV NEWS/गिरिडीह(झारखंड)18 जनवरी। शनिवार को समाहरणालय परिसर से उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी ने जिला सांख्यिकी कार्यालय के सौजन्य से जन्म मृत्यु निबंधन को लेकर जिले में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मौके पर अपर समाहर्ता बिजय सिंह बीरूआ एवं जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, जितेंद्र कुमार दुबे, जिला परिवहन पदाधिकारी, संतोष कुमार, जिला नजारत उप समाहर्ता, आशुतोष ठाकुर एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
मौके पर उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी ने कहा कि जिले के सभी लोगों का जन्म-मृत्यु शत प्रतिशत हो सके, इसी उद्देश्य के तहत जागरूकता रथ को रवाना किया गया है, जो लोगों को जन्म-मृत्यु निबंधन के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ जन्म-मृत्यु निबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी भी देगा। उन्होंने कहा कि परिवार में हुई प्रत्येक जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीकरण कराना कानूनी आवश्यक है, जिसके लिए प्रत्येक जन्म या मृत्यु के घटना होने के 21 दिनों तक निःशुल्क करवा सकते हैं। समय पर पंजीयन करवाने से भविष्य में होने वाले परेशानियों एवं झंझटों से आप बच सकते हैं। जन्म रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड, जन्मस्थान एवं जन्मतिथि का कानूनी प्रमाण होता है। उपायुक्त ने कहा कि जन्म मृत्यु की घटनाओं का निर्धारित समय सीमा के अंदर के अलावा विलंब होने की स्थिति में भी रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकते है, जिसके लिए विलंब शुल्क एवं सक्षम प्राधिकार की अनुमति आवश्यक है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि जन्म एवं मृत्यु का निबंधन बहुत जरूरी है, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र के विभिन्न प्रकार के कार्यों में इसकी अनिवार्यता होती है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सचिव एवं शहरी क्षेत्रों में कार्यपालक पदाधिकारी स्थानीय निबंधक होते हैं।
वहीं जिला सांख्यिकी पदाधिकारी जितेंद्र कुमार दुबे ने बताया कि_ यह जागरूकता रथ जिले के सभी प्रखंडों, नगर निकायों के विभिन्न स्थानों में घूम घूम कर लोगों के बीच जन्म मृत्यु निबंधन की अनिवार्यता एवं इसके फायदे से जागरूक करेगा।
उल्लेखनीय है कि 21 दिन से अधिक किंतु 30 दिन के भीतर विलंब होने पर अधिनियम की धारा 13 (1) के तहत रजिस्ट्रार के आदेश के पश्चात् सूचक / सूचनादाता द्वारा निर्धारित फीस जमा करने के बाद रजिस्ट्रेशन किया जाता है। 30 दिन से अधिक और एक साल के भीतर विलम्ब होने पर अधिनियम की धारा 13 (2) के तहत अपर जिला रजिस्ट्रार के लिखित अनुज्ञा और नोटरी पब्लिक का एफीडेविट/स्व घोषणा पत्र (प्रपत्र 14) देने पर निर्धारित फीस अदा कर रजिस्ट्रेशन किया जाता है। एक साल से अधिक विलम्ब होने पर अधिनियम की धारा 13 (3) के तहत सत्यापन होने के पश्चात् प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेश पर निर्धारित फीस अदा कर रजिस्ट्रेशन किया जाता है। वहीं बच्चे का नाम एक साल तक निःशुल्क और 15 साल तक विलम्बित फीस अदा कर जुडवाया जा सकता है। (धारा-14. नियम-10) इसके अलावा बताया कि शहरी क्षेत्रों में नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी स्थानीय निबंधक होते है। वहीं बताया कि जुड़वा बच्चों की स्थिति में रजिस्ट्रेशन प्रत्येक बच्चे का अलग अलग होता है साथ ही बिना नाम के भी नवजात बच्चे का रजिस्ट्रेशन किया जाता है।
जन्म प्रमाण पत्र के फायदे
▪️जन्म की तारीख एवं स्थान का यह एक प्रमाणिक दस्तावेज है।
▪️विद्यालय में प्रवेश के समय जन्म की तारीख के प्रमाण स्वरूप यह प्रमाण पत्र उपयोगी है।
▪️राशन कार्ड में नाम दर्ज करवाने हेतु उपयोगी है।
▪️ड्राइविंग लाइसेंस बनाने हेतु उपयोगी है।
▪️विदेश यात्राओं के पासपोर्ट के लिए आवश्यक है।
▪️मताधिकार प्राप्त करने के लिए।
▪️वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करने के लिए।
▪️बालिका समृद्धि योजना का लाभप्राप्त करने के लिए
▪️बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी रिकार्ड एवं टीकाकरण के लिए।
▪️देश की वर्तमान जनसंख्या की स्थिति ज्ञात करने के लिए
मृत्यु प्रमाण पत्र के फायदे
▪️मृत्यु की तारीख का यह एक प्रमाणिक दस्तावेज है।
▪️पैतृक सम्पति के दावे के निराकरण में उपयोगी है।
▪️कोर्ट कचहरी में मृत्यु के साक्ष्य के रूप में।
▪️जीवन बीमा, बैंक खातों के लिए उपयोगी।
▪️दुर्घटना आदि में मृत्यु होने पर मुआवजा की प्राप्ति में आवश्यक है।
▪️मृत्यु के कारणों का पता लगाकर इसके उपचार हेतु आवश्यक कदम उठाने के लिए जरूरी।
▪️देश का वर्तमान जनसंख्या की स्थिति की जानकारी प्राप्त करने के लिए।
▪️चिकित्सा विज्ञान के विकास लिए।
▪️शिशु मृत्यु दर एवं मातृत्व मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए।

