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खैरागढ़ विश्वविद्यालय में मकर संक्रांति पर ‘ध्यान संध्या’ आयोजित।

कुलपति डॉ. लवली शर्मा का संदेश : भागदौड़ भरी जीवनशैली में स्वस्थ रहने के लिए दैनिक जीवन में योग अपनाना अनिवार्य।

खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 16 जनवरी। मकर संक्रांति के अवसर पर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में कल ध्यान संध्या का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के योग केंद्र के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसकी मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा रहीं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में योग प्रभारी एवं अधिष्ठाता प्रो. डॉ. राजन यादव तथा कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अजय कुमार पांडेय द्वारा उपस्थितजनों को विभिन्न ध्यान साधनाओं का अभ्यास कराया गया। ध्यान सत्र में “रसो वै सः ध्यान”, “रुद्र ध्यान” तथा त्राटक जैसी महत्वपूर्ण योग साधनाएं सम्मिलित रहीं। “रसो वै सः ध्यान” वैदिक परंपरा पर आधारित ऐसा ध्यान है, जिसके माध्यम से साधक ब्रह्म को आनंद-स्वरूप के रूप में अनुभव करता है। “रुद्र ध्यान” शिव-तत्व के उग्र एवं करुण स्वरूप के जागरण से जुड़ा है, जो साधक में शक्ति, साहस और शुद्धि का संचार करता है वहीं त्राटक दृष्टि-साधना एवं चित्त-शुद्धि का अभ्यास है, जो एकाग्रता और मानसिक स्थिरता को विकसित करता है। तीनों साधनाओं का परस्पर संबंध बताते हुए संयोजक ने कहा कि रसो वै सः ध्यान से आनंद, प्रेम एवं आत्मबोध, रुद्र ध्यान से शक्ति और शुद्धि तथा त्राटक से एकाग्रता एवं मन की स्थिरता प्राप्त होती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। योग के माध्यम से अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग नहीं हो पा रहे हैं, ऐसे में यदि प्रतिदिन थोड़ा-सा समय योग को दिया जाए तो अनेक रोगों से बचाव संभव है। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी। प्रो. डॉ. राजन यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वयं में परमात्मा का दर्शन योग है, दूसरे में परमात्मा का दर्शन भक्ति है और सबमें परमात्मा का दर्शन ज्ञान है। योग से वास्तविक विश्राम और आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में कुछ कर पाने के लिए मजबूत इच्छा-शक्ति का होना आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी शिक्षकों, अधिकारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारीगण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।

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