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पूर्वी सिंहभूम:बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन।

उप विकास आयुक्त, जिला परिषद उपाध्यक्ष, अनुमंडल पदाधिकारी धालभूम, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, बीडीओ, सीओ, मुखिया, ग्राम प्रधान एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी हुए शामिल, बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का लिया गया संकल्प।

RKTV NEWS/जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम)07 जनवरी। मंगलवार को सुरक्षित एवं सशक्त महिला- सशक्त झारखंड के निर्माण के उद्देश्य से ‘बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान’ के अंतर्गत बिरसा मुंडा टाउन हॉल, सिदगोड़ा, जमशेदपुर में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । इस अवसर पर उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान, जिला परिषद उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा, अनुमंडल पदाधिकारी धालभूम अर्नव मिश्रा, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी संध्या रानी समेत अन्य पदाधिकारी और मुखियागण, ग्राम प्रधान, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, एएनएम, पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी सेविकाएं सहित विभिन्न प्रखंडों एवं अंचलों के पदाधिकारी शामिल हुए ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त ने कहा कि परंपराएं तभी तक सम्मान के योग्य हैं, जब तक वे मानव गरिमा और अधिकारों की रक्षा करें । बाल विवाह सामाजिक कुरीति होने के साथ-साथ एक गंभीर अपराध है। उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की लड़की तथा 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है, इसे रोकने के लिए सामूहिक पहल की आवश्यकता है । उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाल विवाह के विरुद्ध समाज को आगे आना होगा और जागरूकता फैलानी होगी। यदि कोई भी व्यक्ति बाल विवाह की सूचना देता है तो प्रशासन उसे रुकवाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं सभी संबंधित सरकारी तंत्र पूर्वी सिंहभूम को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए पूरी तत्परता से कार्य करेंगे।
अनुमंडल पदाधिकारी, धालभूम ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह से संबंधित कार्यशालाएं और चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन अब आवश्यकता है कि इन चर्चाओं को ज़मीनी स्तर पर अमल में लाया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि हममें से कितने लोग अपने आसपास हो रहे बाल विवाह का विरोध करते हैं या उसे रोकने के लिए आगे आते हैं। जिस दिन समाज स्वयं इस कुरीति के खिलाफ आवाज उठाने लगेगा, उसी दिन बाल विवाह में स्वतः कमी आएगी। कानून और सरकारी तंत्र अपना दायित्व निभा रहे हैं, अब समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने जानकारी दी कि राज्य में बाल विवाह की दर 32.2 प्रतिशत है, जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के विरुद्ध सशक्त कार्रवाई के लिए कानून की जानकारी और उसका प्रभावी क्रियान्वयन दोनों ही आवश्यक हैं। बाल विवाह न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि यह एक संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध भी है, जिसे किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जा सकता। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

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