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दुमका परामर्श एवं खरीदार–विक्रेता बैठक ने कृषि और ग्रामीण आजीविका के लिए जलवायु-सहिष्णु मार्ग तैयार किया।

RKTV NEWS/दुमका (झारखंड)12 नवंबर।दुमका में कृषि और ग्रामीण आजीविका की नई दिशा” विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय परामर्श और खरीदार–विक्रेता बैठक का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सरकार, निजी क्षेत्र, शिक्षण संस्थान, बैंकिंग संस्थान और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एक साथ आए, ताकि झारखंड में दुमका को जलवायु-अनुकूल (CRA) कृषि का मॉडल जिला बनाने के लिए एक साझा कार्ययोजना तैयार कर सके।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य दुमका के लिए ऐसी खेती की रूपरेखा बनाना था जो जलवायु के अनुकूल, सबको शामिल करने वाली और विविध फसलों पर आधारित हो। इसका ध्यान पर्यावरण की सुरक्षा, पानी की उपलब्धता और किसानों की आजीविका को मजबूत करने पर था, जिसमें किसान, सरकार, शिक्षण संस्थान और उद्योग सभी का मिलकर योगदान हो।
जलवायु-अनुकूल कृषि की दिशा में पहल परामर्श के दौरान यह साझा किया गया कि जलवायु-सहिष्णु कृषि को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी योजनाओं, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) तथा बैंकिंग संस्थान के बीच समन्वय आवश्यक है। कार्यक्रम की प्रमुख विषयवस्तुएँ इस प्रकार रहीं


● जल-सुरक्षित कृषि: चेक डैम, खेत तालाब और सौर सिंचाई जैसी स्थानीय सिंचाई प्रणालियों को मजबूत करना।
● विविध खेती प्रणाली: देशी धान, दाल, मोटा अनाज (जैसे बाजरा, रागी), तसर पालन और जंगल से मिलने वाले उत्पाद जैसे लाह, शहद आदि को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी और मजबूती बढ़ाना।
● किसान समूह सशक्तिकरण: एफपीओ की क्षमता बढ़ाकर मिलजुलकर बिक्री, उत्पाद में सुधार और ऑनलाइन बाजार से जोड़ना।
● पंचायत स्तर पर कृषि सलाह प्रणाली: पंचायत स्तर पर समुदाय आधारित मंचों के ज़रिए किसानों को मौसम, फसल और बाज़ार से जुड़ी ताज़ा जानकारी दी जाती है। यह डिजिटल माध्यम और युवाओं के नेतृत्व में चलने वाले नेटवर्क के ज़रिए किसानों को समय पर और स्थानीय स्थिति के अनुसार खेती के फैसले लेने में मदद करता है।
● साझा आजीविका: महिलाओं और युवाओं को कस्टम हायरिंग सेंटर और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के ज़रिए रोज़गार के अवसर देना।
चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि जलवायु-अनुकूल खेती के तरीके और स्थानीय स्तर पर बनाई गई कृषि संरचनाएँ किसानों की आमदनी में 20–25% तक बढ़ोतरी कर सकती हैं, साथ ही फसल उत्पादन के जोखिम और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को भी कम कर सकती हैं।
खरीदार–विक्रेता बैठक के माध्यम से बाजार से जुड़ाव को मजबूत करना
कार्यक्रम की खास बात रही खरीदार–विक्रेता बैठक, जिसमें 100 से ज़्यादा किसानों और 30 संस्थागत खरीदारों, प्रोसेसरों और व्यापारियों के बीच सीधा संवाद हुआ।इस बैठक का उद्देश्य किसानों को क्षेत्रीय और राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना और पारदर्शी व लंबे समय तक चलने वाले बाजार संबंध स्थापित करना था।
किसानों ने अपनी स्थानीय उपज जैसे धान, कटहल, बाजरा, सब्जियाँ, बाँस से निर्मित कलात्मक उत्पाद तथा अन्य प्रसंस्कृत मूल्य संवर्धित वस्तुएँ प्रदर्शित कीं। वहीं खरीदारों ने सामूहिक खरीद, प्रसंस्करण और ब्रांडिंग के अवसरों पर चर्चा की। प्रारंभिक रुचि के अनुसार, 150 मीट्रिक टन से अधिक कटहल, सब्जियाँ एवं बाजरा वार्षिक खरीद के लिए प्रस्तावित किए गए।
सीएसआर भागीदारों एवं वित्तीय संस्थानों ने सौर आधारित सिंचाई प्रणालियों, प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज जैसी अवसंरचनाओं में निवेश का इरादा व्यक्त किया।

मुख्य वक्तव्य

अनीकेत सचान (आईएएस), उप विकास आयुक्त, दुमका ने कहा कि “यह पहल दुमका के कृषि परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। सरकार, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र का सामूहिक प्रयास ही दुमका को जलवायु-सहिष्णु और समावेशी ग्रामीण विकास का केंद्र बना सकता है।
एकता जाजू, कार्यकारी निदेशक, स्विचऑन फाउंडेशन ने कहा कि “दुमका परामर्श ने यह दिखाया है कि जब सभी संस्थाएँ मिलकर काम करती हैं, तो जलवायु की चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक खेती के तरीकों को मिलाकर हम एक ऐसा मॉडल बना रहे हैं, जिससे किसान न सिर्फ जलवायु परिवर्तन के अनुरूप ढल सकें, बल्कि न्यायपूर्ण और टिकाऊ बाजारों के माध्यम से समृद्ध भी हों।”
परामर्श के अंत में सभी हितधारकों ने दुमका जलवायु-सहिष्णु कृषि कार्ययोजना (2025–2035) तैयार करने पर सहमति व्यक्त की। यह योजना जिला-स्तर पर निवेश और नीति निर्माण का मार्गदर्शन करेगी, जिसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर बल दिया जाएगा –
● संस्थागत समन्वय और बहु-हितधारक सहयोग को सशक्त बनाना

● पुनर्योजी और जल-सुरक्षित कृषि प्रणालियों का विस्तार

● स्थानीय मूल्य संवर्धन हेतु विकेन्द्रीकृत प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना

● डिजिटल और क्लस्टर आधारित मॉडलों के माध्यम से निरंतर बाजार पहुँच सुनिश्चित करना

नीति समन्वय, क्षमता निर्माण और बाजार विकास को एकीकृत करते हुए, दुमका परामर्श ने झारखंड में सतत और जलवायु-सुरक्षित आजीविका को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ठोस उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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