
RKTV NEWS/पटना(बिहार)31 दिसंबर।आत्मनिर्भरता के विविध रंग और स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की स्वावलंबन की झलक बिहार सरस मेला में प्रदर्शित की गई है l बिहार सरस मेला का आयोजन ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक पहल है l सरस मेला में ग्रामीण परिवेश की महिलाएं अब एक कुशल उद्यमी के तौर पर पुरे देश में अपनी पहचान बना रही हैं l ये महिलाये स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अब अपने हुनर , लोक संस्कृति, परंपरा , लोक कलाकृतियाँ एवं देशी व्यंजनों को राष्ट्रीय पटल पर प्रदर्शित एवं बिक्री करते हुए आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त हुई हैं l इसकी बानगी बिहार सरस मेला में प्रदर्शित है l
बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग, बिहार के तत्वाधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा 12 दिसंबर 25 से 4 जनवरी 26 तक आयोजित है l विशेष कारणों से सरस मेला का आयोजन 1 जनवरी 2026 को स्थगित रहेगा l पुन: 2 जनवरी से सरस मेला अपने समयानुसार चलेगा l
ग्रामीण शिल्प के लिए सरस मेला एक ऐसा मंच है जो स्वदेशी उत्पादों एवं इससे जुड़े लोगों को बाज़ार उपलब्ध कराने के साथ प्रोत्साहन भी देता है l सरस मेला का आयोजन देश के स्वयं सहायता समूहों से जुडी महिलाओं , स्वरोजगारियों ,एवं अन्य शिल्पकारों द्वारा निर्मित उत्पाद हस्त शिल्प एवं लोक कलाकृतियों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए किया जाता है l लिहाजा ग्रामीण शिल्प और उत्पादों को बेचने के लिए सरस मेला एक बड़ा बाज़ार है l यहाँ आकर बिहार के स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं के अलावा देश के अन्य राज्यों की महिलायें लाभान्वित हो रही है l वर्तमान में आयोजित बिहार सरस मेला में 5 सौ से अधिक स्टॉल पर देश भर की कलाकृतियाँ , शिल्प एवं देशी व्यंजन देशी अंदाज में प्रदर्शित है l
सरस मेला में बिहार समेत 24 अन्य राज्यों में आंध्र प्रदेश, गुजरात , आसाम, छत्तीसगढ़, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, कर्णाटक, केरल, मध्य प्रदेश, मणिपुर, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, सिक्किम, और तमिलनाडु की स्वयं सहायता समूह की महिला उद्यमी एवं स्वरोजगारी अपने उत्पाद, कलाकृतियों एवं व्यंजन को लेकर उपस्थित हैं।
मेला के आयोजन के 19 वें दिन एक करोड़ 44 लाख से अधिक के उत्पादों एवं व्यजनो की खरीद –बिक्री हुई है l खरीद बिक्री का आंकड़ा 27 करोड़ पार कर गया है l
विभिन्न विभागों एवं बैंकों के स्टॉल से आगंतुक लोक कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक और लाभान्वित हो रहे हैं l बच्चे-बच्चियां फन जोन एवं पालना घर में खूब मस्ती कर रहे हैं l सेल्फी ज़ोन पर फोटोग्राफी करते हुए आगंतुक सरस मेला के पलों को संजो रहे हैं l आगंतुकों के लिए सरस मेला परिसर में कैशलेश खरीददारी की उपलब्धता ने खरीद-बिक्री को आसान एवं सुरक्षित बनाया है l जीविका दीदियों द्वारा संचालित ग्राहक सेवा केंद्र पर प्रतिदिन 1 लाख से अधिक मी जमा निकासी हो रही है l
नए वर्ष की पूर्व संध्या पर लोग परिवार और संगी साथियों के संघ पधारें l
अपने मनपसंद उत्पादों की खरीददारी के बाद देशी एवं पौष्टिक व्यंजनों का लुत्फ़ उठाया और संध्या समय में मुख्य सांस्कृतिक मंच अपनी लोक संस्कृति से रूबरू हुए l अरुण और उनकी टीम ने लोक नृत्यों की प्रस्तुति की l बारहमासा की प्रस्तुति ने दर्शकों को अपने पुराने संस्कृति एवं परम्परा की यादे ताज़ा कराई l “कईसे खेले जईबू सावन में कजरिया, अरे रामा रिमझिम बरसे बदरिया” समेत कई लोक गीर्तों पर सामूहिक नृत्य ने दर्शकों को झुमाया l मो. शाहिद एवं नाज़िश बानो ने अपनी युगलबंदी से शमा बाँधा l “होश वालों को क्या खबर है गजल, जिंदगी क्या चीज है” की प्रस्तुति ने शाहिद ने दर्शकों की वाहवाही लूटी। आशा कुमारी , परियोजना प्रबंधक, जीविका ने अपनी स्वरचित रचना “सरस मेला, जीविका बिहार हैं हम” की प्रस्तुति से सरस मेला के आयोजन एवं उससे दी जा रही संदेशों से दर्शकों को अवगत कराया l कार्यक्रम के अंत में नाज़िश बानो, राज्य परियोजना प्रबंधक, एवं आशा कुमारी, परियोजना प्रबंधक ने जीविका की तरफ से सभी आगंतुकों को नव वर्ष की बधाई एवं शुभकामनाएँ दी।मंच संचालन मो. शाहिद, जीविका ने किया ।
