वक्ताओं ने उनके कृतित्व और व्यक्तित्व की विस्तार पूर्वक की विवेचना।

आगत अतिथियों द्वारा स्वामी जी के तैलीय चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर दी गई श्रद्धांजलि।

व्यास “कमलेश आनंद”ने अपने गीत के माध्यम से दी संगीतांजलि।
आरा/ भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 23 दिसम्बर। स्थानीय आर्य समाज मंदिर में आज स्वामी श्रद्धांनंद जी के बलिदान दिवस के अवसर आर्य समाज के श्रद्धानंद भवन में स्वामी श्रद्धानंद जी का 99 वा बलिदान दिवस का आयोजन किया गया।मुख्य अतिथि एवं अन्य आगत अतिथियों सहित समस्त वक्ताओं ने 19 वीं के सदी महानतम स्वामी संत स्वामी दयानंद सरस्वती के त्याग बलिदान पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें नमन करते हुए उनके जीवन से समाज को प्रेरणा लेने के आह्वाहन के साथ उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओ ने कहा कि स्वामी जी का उदेश्य समाज को जोड़ना था ना कि धर्म व जाती के नाम पर बांटना था। वक्ताओ ने कहा कि वेद सार्वोपरी ग्रन्थ है। इसी के बल पर भारत विश्व गुरू बना। आवश्यकता है कि आडम्बर से बचते हुए स्वामी जी के उदेश्य को जन जन तक पहुंचाया जाए और महिलाओ को सम्मान देते हुए आर्य समाज से जोड़ा जाय। माइकले के शिक्षा से संस्कार विहीन भारत के खिलाफ स्वामी जी ने गुरुकुल कि स्थापना की। आर्य समाज मंदिर वैदिक मूल्यों की ओर लौट कर ही समाज का सर्वांगीण उत्थान संभव है। इसलिए आज भौतिकवाद भोगवाद अंधविश्वास पाखंड आडंबरों की अंधी दौड़ में फसी मानव जाति के उद्धार के लिए आर्य समाज से जुड़ने की आज के समय व समाज की सख्त आवश्यकता है। समस्त संगठनों से ऊपर वैदिक संस्कृति भारतीय संस्कृति जो दिशा विशिष्ट विश्व विशिष्ट संस्कृति है उसकी रक्षा कर ही हम वास्तविक रूप में राष्ट्र का गौरव बढ़ा सकते हैं और विश्व गुरु की संज्ञा प्राप्त करने की ओर अग्रसर हो सकते हैं। विश्व शांति की कल्पना यदि जय घोष के साथ सर्व मंगल प्रार्थना सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाह यह है भारतीय संस्कृति को स्थापित करने के दिशा में आर्य समाज सतत प्रयत्नशील है।
स्वामी जी की 23 दिसंबर 1926 को उन्मादी द्वारा गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।इनका जीवन पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी, अध्यापक और समाजसेवा में आर्य समाज के सन्यासी के रूप में था। वे भारत के उन महान राष्ट्भगक्त सन्यासियो में अग्रणी थे। जिन्होंने अपना जीवन स्वाधीनता स्वराज,शिक्षा तथा वैदिक धर्म के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उहोने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय सहित अनेक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की और हिंदू समाज व भारत को संगठित करने तथा 1920 के दशक में शुद्धि आंदोलन चलाने में भूमिका अदा की।उन्होंने अछूतो के लिए भी महान कार्य किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दुर्गा राज जिलाध्यक्ष भाजपा, रामानंद प्रसाद आर्य कार्यकारी प्रधान बिहार राज्य प्रतिनिधि सभा, सिद्धेश्वर वर्मा,सुखलाल प्रसाद , विद्यासागर जी, वेद आनंद, विद्याभूषण , संजय, अरुण, प्रोफेसर हरि नारायण आर्य, डॉक्टर सुरेंद्र प्रसाद, आरबी सिंह, आचार्य ओम प्रकाश शास्त्री प्रधान आर्य समाज, इंद्रमणि सिंह,आशीष कुमार शर्मा, धीरज कुमार, गोविंद कुमार, संजय वर्मा,विनोद राज सच्चिदानंद, ज्ञानेश्वर प्रसाद आर्य, ओम प्रकाश , डॉक्टर उमेश प्रसाद ,नीरज कुमार,प्रकाश रंजन आदि शामिल थे। कार्यक्रम का प्राकृतिक योग पीठ के संस्थापक स्वामी विक्रमादित्य ने संचालित करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

