
भोपाल/मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद)21 दिसंबर। भोपाल के साहित्यकारों के बच्चों ने कार्यक्रम ओजपूर्ण रचनाओं का पाठ किया।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद भोपाल इकाई की अध्यक्ष डाॅ नुसरत मेहदी ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते कहा कि वीर बाल दिवस गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबज़ादों के अद्वितीय साहस, आस्था और राष्ट्रधर्म की स्मृति का प्रतीक है। परिषद ने आज छोटे बच्चों को देशभक्ति पूर्ण प्रस्तुतियों हेतु आमंत्रित किया है। साहित्य और काव्य के माध्यम से बाल मन में देशभक्ति और संस्कारों का संचार ही इस आयोजन का उद्देश्य है।
अतिथि वक्ता ओमप्रकाश खुराना ने कहा कि आज का दिन वीर बाल दिवस है यह हमें सनातन संस्कृति की रक्षा तथा अनीति के सामने कभी ना झुकने की हिम्मत देता है. औरंगजेब के समय जो भी व्यक्ति इस्लाम धर्म कबूल नहीं करता था उन्हें बहुत प्रताड़ित किया जाता था. गुरु गोविंद सिंह के बच्चों ने भी धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया तथा .जब उन्होंने किलेदार की बात नहीं मानी तो सरहंद के किलेदार नेउन्हें बहुत प्रताड़ित किया।इस प्रसंग में औरंगजेब के कहने पर 26 दिसंबर को अजीत सिंह तथा उनके छोटे भाई जुझार सिंह जो मात्र 18 और 15 वर्ष के थे.सरहंद के किलेदार ने उन्हें दीवार में चुनवा दिया था.हम उनकी वीरता और साहस को नमन करते हैं।
इसी क्रम में आमंत्रित वक्ता गोपेश बाजपेई ने अपने वक्तव्य में कहा कि गुरु गोविन्द सिंह के सपूत,वीर बालक,आठ वर्षीय जोरावरऔर छह वर्ष के फतेह सिंह ने जालिम हुकूमत के अन्याय के नीचे दबने की बजाए दीवार में चुनवाया जाना स्वीकार किया ।ये दोनों ही वीर बालक अपने धर्म पर दृढ़ और निडर बने रहे।
