भास्कर के निधन से चित्रकला में भोजपुरी लोक कला की पहचान को आघात : सुमन कुमार सिंह
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)10 दिसंबर।आरा-भोजपुर जनपद में रहकर अपनी चित्रकला की पढा़ई पूरी करने और समकालीन कला की दुनिया में अपनी मौलिक छाप छोड़ने में सफल भुवनेश्वर भास्कर अब नहीं रहे। दिल की बीमारी और फिर ब्रेन हेमरेज से जूझ रहे भुवनेश्वर भास्कर ने पिछले दिनों दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम साँस ली। नब्बे के दसक में साहित्य-कला-संस्कृति के क्षेत्र में भोजपुर का जो युवा उभार देशभर का ध्यान आकर्षित कर रहा था उसमें कवि, कहानीकार, रंगकर्मी, चित्रकार-मूर्तिकार के रूप कई नाम लोगों का ध्यान आकृष्ट कर रहे थे। उसी दौर में भुवनेश्वर भास्कर जैसे चित्रकार ने कला की दुनिया में भी दस्तक दी थी।
लगभग दस वर्षों तक आरा में रहकर चित्रकला-लोक कला , नाटक और कला समीक्षा के क्षेत्र में भास्कर ने अपनी पहचान बनाई। उनके रहते कला क्षेत्र का एक नवीन परिवेश निर्मित हुआ। अपने चित्रों में कठपुतलियाँ, विजूके, कोहबर, पिड़िया आदि को नये रूप में पुनर्सृजित किया। विगत डेढ़ दसकों से वे सपरिवार दिल्ली रह रहे थे। वे एक विशुद्ध कलाकार थे। कला समीक्षा पर उनकी पुस्तकें भी प्रकाशित हैं। उन्हें बिहार तथा देश स्तर पर कई सम्मान भी प्राप्त थे।
कलाकार भुवनेश्वर की स्मृति में जन संस्कृति मंच, आरा-भोजपुर ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनके निधन से राष्ट्रीय स्तर पर कला क्षेत्र में भोजपुरी लोक कला की बढ़ती साख को धक्का लगा है। वरिष्ठ कथाकार सुरेश कांटक, जसम बिहार के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार, कवि सुमन कुमार सिंह, रंगकर्मी शमशाद प्रेम, अरुण प्रसाद, धनंजय, आलोचक सुधीर सुमन, पत्रकार प्रशांत कुमार बंटी,कवि बलभद्र, सुनील चौधरी, मूर्तिकार ओमप्रकाश, सूर्यप्रकाश, अमित मेहता, विक्रांत कुमार आदि ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त की।

