
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)07 दिसंबर। शनिवार को महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर भोजपुर जिला समाहरणालय के समक्ष बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थल पर माल्यार्पण कार्यक्रम का आयोजन युवा राजद के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इन्होंने श्रद्धा सुमन अर्पिटते हुए बताया कि डॉ.भीमराव आंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन का प्रेरणादायी उदाहरण है। 14 अप्रैल 1891 को महू में जन्मे बाबा साहब को जाति भेदभाव का सामना बचपन से करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे चुनौती बनाकर ज्ञान का मार्ग चुना। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा हासिल की, जो उस समय किसी भारतीय के लिए असाधारण उपलब्धि थी।इनका प्रमुख लक्ष्य समाज में बराबरी स्थापित करना था। उन्होंने दलित, महिला और श्रमिक वर्ग के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। वे मानते थे कि शिक्षा और आत्मसम्मान किसी भी समाज के उत्थान की कुंजी हैं। न्याय और समानता के लिए उनके प्रयासों ने उन्हें राष्ट्र के शीर्ष सामाजिक सुधारकों की श्रेणी में ला खड़ा किया। संविधान निर्माता के रूप में उनके योगदान को हमेशा सम्मान से याद किया जाएगा। 6 दिसंबर 1956 को उनका निधन हुआ, यह दिन हमें याद दिलाता है कि समाज में समानता, मानवता और लोकतंत्र के मूल्यों को आगे बढ़ाना ही आंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी संकल्प, परिश्रम और शिक्षा के बल पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
