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बागपत:जिलाधिकारी ने बागपत में ‘बर्तन बैंक’ पहल की शुरुआत, गांव ग्वालिखेड़ा से की जो विभिन्न सामाजिक उद्देश्यों से जुड़ी है इस पहल से ग्रामीणों को मिलेगी सुविधा।

ग्रामीण और शहरी, सभी लोगों को बर्तन बैंक से कम शुल्क पर मिलेंगे बर्तन, खर्च होगा कम और साथ ही बचेगा पर्यावरण।

बर्तन बैंक से बागपत को पर्यावरण बचाने का मिला टिकाऊ विकल्प, अब ग्राम पंचायतों की बढ़ेगी आय।

जिलाधिकारी का आह्वान जिम्मेदार और जागरूक बने, बर्तन बैंक का प्रयोग करे।

बर्तन बैंक साधेगा कई लक्ष्य, प्लास्टिक होगी कम, बढ़ेगी स्वच्छता, ग्रामीण पंचायतें होगी सशक्त और मिला पर्यावरण अनुकूल विकल्प।
सभी उत्सव-त्यौहार देंगे पर्यावरण बचाने का संदेश, ग्रामीण गर्व के साथ अपनाएंगे बर्तन बैंक, लोगों में दिखा उत्साह।

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)04 नवंबर।अब शादी, जन्मदिन जैसे कार्यक्रमों में बागपतवासी पर्यावरण बचाने का संकल्प दोहराते नजर आएंगे। इस दिशा में एक उल्लेखनीय पहल करते हुए बागपत जिला प्रशासन ने स्थानीय ग्राम पंचायतों के सहयोग से “बागपत बर्तन बैंक” योजना की शुरुआत की है।
बागपत जिले में ग्रामीण आयोजनों, शादियों और धार्मिक कार्यक्रमों में डिस्पोजेबल प्लास्टिक बर्तनों के बड़े पैमाने पर उपयोग से हर महीने कई टन कचरा उत्पन्न हो रहा था। यह कचरा जल स्रोतों और खेतों में फैलकर पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बन रहा था। इस समस्या से निपटने और ग्रामीणों को सस्ता व टिकाऊ विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रशासन ने “बर्तन बैंक” की सोच को आकार दिया। यह नवोन्मेषी एवं अनुकरणीय पहल प्लास्टिक कचरे को कम करने और गांवों में एकता, एकजुटता एवं जिम्मेदारी के भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
“बर्तन बैंक” के तहत एक ऐसा भंडार तैयार किया गया है जिसमें रसोई के बर्तन और खाने-पीने के बर्तन उपलब्ध रहेंगे। प्रत्येक विकास खंड के चुनिंदा गांवों में यह स्थापित हो रहे है जहां से ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के निवासी सामाजिक आयोजनों, समारोहों और सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए इन बर्तनों को उधार ले सकते हैं और उपयोग के बाद साफ करके वापस कर सकते हैं। इस पहल से एक बार उपयोग कर फेंकी जाने वाली एकल-उपयोग (डिस्पोजेबल) प्लास्टिक और पेपर बर्तनों के प्रयोग में कमी आएगी, घरों का खर्च घटेगा और समुदाय में सहयोग की भावना मजबूत होगी।
पहले जहां शादी-ब्याह या उत्सवों के बाद गांव की गलियों में प्लास्टिक प्लेटें बिखरी मिलती थीं, वहीं अब आयोजन के बाद लोग खुद आगे बढ़कर बर्तन धोने और व्यवस्थित रखने में सहयोग करते दिखाई देंगे। यह केवल स्वच्छता नहीं बल्कि सामाजिक चेतना और सामूहिक जिम्मेदारी की नई संस्कृति का संकेत है।
बागपत विकास खंड के ग्वालीखेड़ा गांव में स्थापित हुए जनपद के पहले बर्तन बैंक के शुभारंभ अवसर पर जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि बर्तन बैंक एक पर्यावरणीय एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पहल है जो हमारे देश के प्राचीन मूल्यों — साझा करने, सततता और आत्मनिर्भरता — की भावना को दर्शाता है। इस प्रयास के माध्यम से बागपत अन्य जिलों के लिए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करेगा। बर्तन बैंक एक सोच है — “मिलजुलकर कम खर्च में स्वच्छ आयोजन” की सोच।
अब किसी ग्रामीण को अपने सामुदायिक, सामाजिक अथवा निजी कार्यक्रमों के लिए बर्तन खरीदने या किराए पर लेने की चिंता नहीं रहेगी क्योंकि ग्राम पंचायत का बर्तन बैंक उन्हें बाजा रेट से आधे किराए पर यह उपलब्ध कराएगा। इस बर्तन बैंक को ग्राम पंचायत खुद संचालित करेगी। इसमें खाना पकाने से लेकर परोसने तक के सभी बर्तन शामिल हैं। यह पहल प्रत्येक विकास खंड में लागू की जा रही है और इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक से गांवों का चयन किया गया है। बागपत में ग्वालीखेड़ा, बड़ौत में मलकपुर, बिनौली में दाहा और निरपुडा, खेकड़ा में काठा, छपरौली में रमाला और पिलाना गांव को इस योजना में शामिल किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में बर्तन रखने हेतु एक समर्पित भंडारण केंद्र स्थापित किया गया है। पंचायत स्तर पर बर्तनों की देखभाल, रजिस्टर में अभिलेख रखना और उचित व न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी। तीन चरणों में इस पहल को आगे बढ़ाया जाएगा।
आमतौर पर कार्यक्रमों में प्लास्टिक का प्रयोग इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि उसमें खाना खाने के बाद उसे फेंकना आसान होता है जबकि प्लास्टिक में खाने के कई नुकसान है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सबसे जरूरी है जिम्मेदारी का भाव। जब हम प्लास्टिक के बजाय बर्तन बैंक से बर्तन किराए पर लेंगे तो इससे जो ग्राम पंचायत को पैसा जाएगा वह हमारे गांव को बेहतर बनाने में ही खर्च होगा।
बर्तन बैंक में थाली, ग्लास, चम्मच, जग, परात (स्टील एवं सिल्वर), भगौने, बाल्टी, कुकर, सिल्वर टब और कलचे, पोनी, पलटे आदि शामिल हैं। इसे ग्राम पंचायत घर में स्थापित किया जाएगा, जहां से ग्रामीण आवश्यकतानुसार सामूहिक या निजी आयोजनों के लिए बर्तन ले सकेंगे। यह पहल न केवल खर्च कम करेगी बल्कि समाज में सहयोग और साझा उपयोग की भावना को भी मजबूत करेगी।

योजना के क्रियान्वयन के चरण

1. चरण 1: चयनित ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरुआत होगा जिसमें शामिल है बर्तन बैंक की व्यवस्था को चुनिंदा गांवों में लागू करना और इसको बेहतर बनाने हेतु सुझाव प्राप्त करना।
2. चरण 2: पूरे बागपत जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में आवश्यकतानुसार इस पहल के विस्तार की योजना
3. चरण 3: बर्तन बैंक के साथ-साथ अन्य सामुदायिक संसाधनों जैसे टेंट, बड़े पकाने के बर्तन आदि को शामिल करना।

यह पहल भारत सरकार के प्लास्टिक कूड़े कचरे में कमी लाने के लक्ष्य से जुड़ी होने के साथ साथ स्वच्छ भारत मिशन को एक नया स्वरूप प्रदान करती है क्योंकि यह कचरा प्रबंधन की स्थानीय स्तर पर एक ठोस और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करती है। साथ ही राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर चल रहे सतत विकास लक्ष्यों विशेषकर लक्ष्य संख्या 12 ‘जिम्मेदार खपत और उत्पादन’ तथा लक्ष्य 13 ‘जलवायु कार्रवाई’ से भी सीधा जुड़ाव रखता है। बर्तन बैंक जैसी स्थानीय नवाचार योजनाएँ भारत के “स्वच्छ भारत” और “हरित पंचायत” अभियानों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
इस योजना से ग्राम पंचायतों की आय में भी वृद्धि होगी क्योंकि बर्तन किराए पर देने से प्राप्त शुल्क पंचायत निधि में जमा किया जाएगा। कई जगहों पर महिला स्वयं सहायता समूहों को बर्तन बैंक संचालन की जिम्मेदारी देना का विचार है जिससे उन्हें आय का स्रोत और आत्मनिर्भरता का अवसर मिलेगा।
आमतौर पर जो लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक होते है उन्हें भी कोई प्लास्टिक का विकल्प न मिलने से यह समस्या बढ़ती जाती है। सभी ग्रामीणों तक पर्यावरण बचाने का एक अच्छा एवं पर्यावरण के अनुकूल टिकाऊ विकल्प लेकर बर्तन बैंक पहुंचेगा। साथ ही, यह गरीब और ग्रामीण परिवारों के आयोजन खर्च को भी कम करने में मदद करेगी। कई ग्रामीणों ने कहा कि प्लास्टिक तो प्रयोग करना हमे भी अच्छा नहीं लगता लेकिन बर्तन महंगे मिलते थे और प्लास्टिक सस्ती। अब बर्तन बैंक से आधे शुल्क पर बर्तन मिलेंगे तो खूब उनका प्रयोग करेंगे।
योजना की दीर्घकालिक सफलता के लिए जिला प्रशासन द्वारा इस पहल से जुड़े महत्वपूर्ण हितधारकों जैसे पंचायत सदस्यों और ग्रामीणों के लिए जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमें स्वच्छता, रखरखाव और पर्यावरणीय लाभों की जानकारी दी जाएगी। उम्मीद की जा रही है कि आगामी “स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण” में बागपत इस पहल के कारण विशेष पहचान बनाएगा।
जिला प्रशासन, ग्राम पंचायतों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयास से बागपत सतत सामुदायिक पहलों का एक आदर्श जिला बनने की दिशा में बागपत अग्रसर है ।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान सोनिया, प्रधान पति दीपक शर्मा जिला विकास अधिकारी राहुल वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्रा ,खंड विकास अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी ग्रामवासी उपस्थित रहे।

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